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SC: 'दहेज उत्पीड़न के आरोपी पति पर जमानत के लिए पत्नी के साथ रहने की शर्त जोखिम भरी'; शीर्ष कोर्ट की टिप्पणी

Sun, 03 Aug 2025 05:27 AM IST
शिव शुक्ला अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि दहेज उत्पीड़न के मामले में अग्रिम जमानत के लिए आरोपी पति पर पत्नी के साथ सम्मान और गरिमा के साथ रहने की शर्त लगाना, जोखिम भरा हो सकता है। इस टिप्पणी के साथ शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत के लिए लगाई गई ऐसी शर्त को रद्द कर दिया।

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जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने ऐसी शर्त लगाने की निंदा करते हुए कहा, यह सीआरपीसी की धारा 438 (2) से संबंधित नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि पति-पत्नी एक समय पर अलग हो गए थे और कुछ समय तक अलग रहे थे। यह शर्त लगाना कि अपीलकर्ता पत्नी के साथ सम्मान और गरिमा के साथ रहेगा, जोखिम भरा है क्योंकि इससे आगे मुकदमेबाजी हो सकती है। पीठ ने कहा, हमारा विचार है कि हाईकोर्ट को अग्रिम जमानत पर पूरी तरह से गुण-दोष के आधार पर विचार करना चाहिए था, न कि ऐसी शर्त लगाने पर जो सीआरपीसी की धारा 438 (2) से संबंधित नहीं है। ब्यूरो

अपीलकर्ता पति पर भारतीय दंड संहिता की धारा 498-ए (क्रूरता), 323 (स्वेच्छा से चोट पहुंचना), 313 (सहमति के बिना गर्भपात कराना), 506 (आपराधिक धमकी), 307 (हत्या का प्रयास), 34 (साझा इरादा) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था। पति की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट ने इस शर्त पर गिरफ्तारी-पूर्व जमानत देने पर सहमति जताई कि अपीलकर्ता-पति अपनी पत्नी के साथ फिर से वैवाहिक जोड़े की तरह रहेगा। उसका सम्मान और गरिमा के साथ भरण-पोषण करेगा।
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ऐसी शर्त लगाए जाने से व्यथित होकर पति ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। यह देखते हुए कि हाईकोर्ट ने त्रुटि की है, शीर्ष न्यायालय ने कहा,यदि इस आधार पर कि ऐसी शर्त का पालन नहीं किया गया है और जमानत रद्द करने का आवेदन दायर किया जाता है तो अपीलकर्ता इसका विरोध करेगा। यह हाईकोर्ट को और भी कठिनाई में डाल सकता है।

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