सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व विधानसभा में भाजपा के नेता विपक्ष बाबूलाल मरांडी को दलबदल विरोधी कार्रवाई के मामले में राहत दे दी। शीर्ष अदालत ने मरांडी के खिलाफ दलबदल विरोधी कार्रवाई पर हाईकोर्ट की तरफ से लगाई गई अंतरिम रोक को चुनौती देने वाली झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रविंद्रनाथ महतो की याचिका खारिज कर दी।
चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले पर हाईकोर्ट में बुधवार को निर्णायक सुनवाई होनी है, ऐसे में वह विधानसभा स्पीकर की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई नहीं कर सकती।
चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी. रामासुब्रमण्यम की मौजूदगी वाली पीठ ने हालांकि यह भी कहा कि हम हाईकोर्ट से इस मामले का तत्काल समाधान करने का आग्रह करते हैं। याचिकाकर्ता (स्पीकर) को भी रिट याचिका में उठाए गए सभी सवाल हाईकोर्ट के सामने रखने की छूट है।
दलबदल से जुड़ा है पूरा मामला
दरअसल बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की धनवार विधानसभा सीट से झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातांत्रिक (जेवीएम-पी) के टिकट पर जीत हासिल की थी। पिछले साल फरवरी में उन्होंने जेवीएम-पी का भाजपा में विलय कर लिया था।
लेकिन पार्टी के दो अन्य विधायकों प्रदीप यादव और बंधु टिर्की को उन्होंने निलंबित कर दिया था, जो बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए थे। विधानसभा अध्यक्ष की तरफ से मरांडी को दलबदल के लिए संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत उल्लंघन पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
इस नोटिस के खिलाफ मरांडी ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। पिछले साल 17 दिसंबर को हाईकोर्ट ने नोटिस पर 13 जनवरी तक रोक लगा दी थी।