असम के वरिष्ठ कांग्रेस नेता देवव्रत सैकिया का विधानसभा के नेता विपक्ष का दर्जा खत्म करने की अधिसूचना पर मंगलवार को गुवाहाटी हाईकोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी। 126 सदस्यीय विधानसभा में नेता विपक्ष की भूमिका निभा रहे सैकिया का यह दर्जा खत्म करने की अधिसूचना विधानसभा सचिव ने एक जनवरी को जारी की थी।
विधानसभा सचिव ने कहा था कि नेता विपक्ष का दर्जा हासिल करने के लिए सदन में पार्टी के 26 विधायकों का होना अनिवार्य है। विधानसभा में इस समय भाजपा के 60, जबकि कांग्रेस के 21 विधायक हैं। कांग्रेस ने 2016 में चार अन्य सीट भी जीती थीं, जो फिलहाल खाली पड़ी हैं।
ये सीट पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष प्रणब गोगोई के निधन व अजंता नियोग और राजदीप गोयाला के भाजपा का दामन थाम लेने के कारण खाली हैं। ऐसे में सैकिया को नेता विपक्ष का पद नहीं दिया जा सकता है। हालांकि सैकिया ने इस अधिसूचना को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जस्टिस अचिंत्य मल्ला बुजोर बरुआ ने विधानसभा के स्पीकर, सचिव व प्रधान सचिव और राज्य के मुख्य सचिव को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का नोटिस जारी करते हुए मंगलवार को अधिसूचना पर अंतरिम रोक लगा दी।