मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने 26 सप्ताह के गर्भ को गिराने की इजाजत वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि 20 सप्ताह से ज्यादा के गर्भ को गिराने की इजाजत उसी स्थिति में दी जा सकती है जब मां की जान या भ्रूण को खतरा हो।
मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक पैदा होने वाला बच्चा शारीरिक और मानसिक समस्याओं से ग्रसित या कम बुद्धिक्षमता वाला हो सकता है, लेकिन इससे मां के स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि ये दु:खद है कि जन्म लेने वाला बच्चा शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करेगा और यह मां के लिए यह दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन हम गर्भपात की इजाजत नहीं दे सकते। हमारे हाथों में एक जिंदगी है।