सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को ‘कोरोनिल’ ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने की छूट दे दी। शीर्ष कोर्ट ने मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। मद्रास हाईकोर्ट ने एकल जज के उस फैसले पर रोक लगाई थी जिसमें पतंजलि को कोरोनिल नाम का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था। चेन्नई की कंपनी अरुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने मद्रास हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
सीजेआई एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस व रामासुब्रमण्यन ने कहा, अगर हम इस आधार पर कोरोना महामारी के दौरान ‘कोरोनिल’ शब्द के इस्तेमाल को रोकते हैं कि इसके नाम पर कोई कीटनाशक है, तो यह पहले उत्पाद के लिए गलत होगा। पीठ ने पाया कि यह मामला पहले ही हाईकोर्ट में लंबित है और सितंबर में इस पर सुनवाई होनी है।
पीठ ने याचिकाकर्ता से अपनी अर्जी वापस लेने को कहा और मामले को खारिज कर दिया। अरुद्र इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड ने मद्रास हाईकोर्ट के एकल जज के समक्ष अपील की थी कि उसने 1993 में कोरोनिल ट्रेडमार्क लिया था।
अत: पतंजलि द्वारा इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए। जज ने इसे स्वीकार करते हुए पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट के कोरोनिल ट्रेडमार्क का इस्तेमाल करने से रोका था और 10 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हालांकि बाद में मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने इस फैसले पर दो हफ्ते की रोक लगाई थी।