‘लव जिहाद’ से जुड़े एक मामले में कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई करने से इनकार कर दिया। एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिये कथित तौर पर किए गए खुलासे में दावा किया गया था कि ‘लव जिहाद’ जैसा शब्द मुस्लिम युवाओं को निशाना बनाने को उछाला गया है।
कनार्टक हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर इस मामले की जांच कराने की मांग की गई थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था। इसके बाद कर्नाटक निवासी मोहम्मद रियाज ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए कहा कि इस तरह के मामले संज्ञेय अपराध हैं। इनमें एफआईआर दायर की जानी चाहिए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘आप एफआईआर क्यों नहीं दायर करते?
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आपने जनहित याचिका दायर की है, इससे अदालत को दूर रहना चाहिए। यह कहते हुए चीफ जस्टिस न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति एएम खानविलकर और न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने याचिका खारिज कर दी।’ इससे पहले, हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस मामले की जांच कराने को कहा गया था।
दरअसल, एक वेबसाइट पर हुए स्टिंग के हवाले से कहा गया था कि भाजपा के पूर्व विधायक ने कथित तौर पर दावा किया कि ‘लव जिहाद’ जैसा जुमला मुस्लिमों को निशाना बनाने के लिए उछाला गया। तब हाईकोर्ट ने याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि यह एक मीडिया रिपोर्ट पर आधारित है और जो छपता है, वह हमेशा सच नहीं होता।