पीठ ने कहा था, 'यदि राजनीतिक दल 100 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड हासिल करते हैं, तो इस बात का क्या भरोसा है कि इसे किसी अवैध मकसद या हिंसात्मक गतिविधियों को मदद देने में इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।' उसने साथ ही कहा कि वह राजनीति में दखल नहीं देना चाहती और ये टिप्पणियां किसी विशेष राजनीतिक दल के लिए नहीं की गई हैं। केंद्र ने पीठ से कहा था कि चुनावी बॉन्ड की वैधता 15 दिन की है और राजनीतिक दलों को अपना इनकम टैक्स रिटर्न भी भरना है। उसने कहा कि खरीदार को वैध धन का इस्तेमाल करना होगा और चुनावी बॉन्ड की खरीदारी बैंकिंग माध्यम से होगी।
सरकार ने कहा था, 'आतंकवाद को वैध धन से वित्तीय मदद नहीं दी जाती। इसे काले धन के जरिए मदद दी जाती है।' एनजीओ ने कहा कि दाता (डोनर) की पहचान पहचान उजागर नहीं की जाती और चुनाव आयोग तथा भारतीय रिजर्व बैंक ने भी इस पर आपत्ति जतायी है। उसने यह भी दावा किया कि चुनावी बॉन्ड से मिलने वाली अधिकतर राशि सत्तारूढ़ पार्टी को मिली है। गौरतलब है कि तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल और पुडुचेरी में 27 मार्च से 29 अप्रैल के बीच विधानसभा चुनाव होंगे।