अब्दुल्ला आजम को मुरादाबाद की कोर्ट ने 13 फरवरी 2023 को 15 साल पुराने मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। 29 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस ने पूर्व मंत्री आजम खान की कार को चेकिंग के लिए रोका था, जिससे उनके समर्थक भड़क गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने सपा नेता और पूर्व सांसद आजम खां के बेटे मोहम्मद अब्दुल्ला आजम को राहत देने से इनकार कर दिया है। दरअसल, कोर्ट ने अब्दुल्ला की दोषसिद्धि पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार कर दिया। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी करते हुए सुनवाई की अगली तारीख पांच अप्रैल तय कर दी।
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पीठ ने अब्दुल्ला आजम के वकील को याचिका की प्रति यूपी सरकार के वकील को देने का निर्देश दिया। दरअसल, 15 साल पुराने मामले में दोषी ठहराए जाने और दो साल कैद की सजा सुनाए जाने के बाद अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द कर दी गई थी। जिसके खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। अब्दुल्ला के वकील विवेक तन्खा ने पीठ से कहा कि अब्दुल्ला आजम को दोषी कैसे ठहराया जा सकता है, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार उस समय वह 15 वर्ष के किशोर थे।
दरअसल, अब्दुल्ला आजम को मुरादाबाद की कोर्ट ने 13 फरवरी 2023 को 15 साल पुराने मामले में दो साल की सजा सुनाई थी। 29 जनवरी 2008 को छजलैट पुलिस ने पूर्व मंत्री आजम खान की कार को चेकिंग के लिए रोका था, जिससे उनके समर्थक भड़क गए थे। इसके बाद समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया था। इस हंगामे में अब्दुल्ला समेत नौ लोगों को आरोपी बनाया गया था। पुलिस ने इस मामले में हंगामा करने वाले सभी लोगों पर सरकारी काम में बाधा डालने और भीड़ को उकसाने के आरोप में केस दर्ज किया था।
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इस मामले में कोर्ट ने आजम खां के साथ अब्दुल्ला आजम को भी दो साल की सजा सुनाई थी। इसके बाद विधानसभा सचिवालय की ओर से 15 फरवरी को अब्दुल्ला आजम की विधायकी रद्द किए जाने संबंधी आदेश जारी किया गया था। अब्दुल्ला 2017 के विधानसभा चुनाव में रामपुर जिले की स्वार सीट से निर्वाचित हुए थे। इस फैसल के खिलाफ अब्दुल्ला ने इलाहाहाबाद हाईकोर्ट में भी अर्जी दाखिल कर रखी है। याचिका 17 मार्च को दाखिल की गई थी, जिसमें कोर्ट ने यूपी सरकार से तीन हफ्ते के अंदर जवाब दाखिल करने को कहा था।