सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पोर्नोग्राफी व यौन अपराधों के बीच संबंध के अध्ययन की मांग को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से इन्कार कर दिया। भाजपा के प्रवक्ता नलिन कोहली की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई से इन्कार करते हुए प्रधान न्यायाधीश यूयू ललित और न्यायमूर्ति एसआर भट की पीठ ने कहा, हमें यहां बहुत सावधानी से चलना होगा, क्योंकि आप जिस चीज की वकालत कर रहे हैं वह आखिर में एक किस्म की निगरानी और डाटा जमा करने से जुड़ा है। जबकि, सरकार के पास इंटरनेट पर आपत्तिजनक सामग्री को रोकने के लिए पहले से ही पर्याप्त कानूनी तरीके मौजूद हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उद्धरण देते हुए जस्टिस भट ने कहा, इंटरनेट पर पाबंदी को लेकर इसी तरह के एक मामले में एक जज ने कहा था कि हवन करने के लिए हाथ नहीं जलाए जा सकते। पीठ ने कहा कि यह जंगली बाघ को इंसानी बस्ती में खुले छोड़ने जैसा है, बाद में इसे नियंत्रित कौन करेगा?
इस दौरान कोहली ने असम के एक मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि छह साल की दुष्कर्म की पीड़िता के मामले में पोर्नोग्राफी और यौन हमले के बीच सीधा संबंध पाया गया था। इसपर अदालत ने कहा कि बाल अश्लील सामग्री अपने आप में अपराध है। अदालत के फैसले लागू करने योग्य होने चाहिए।