सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की ओर से दाखिल एक याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। इस याचिका में पश्चिम बंगाल सरकार, राज्य निर्वाचन पैनल और अन्य पदाधिकारियों को कोलकाता में निष्पक्ष और मुक्त निकाय चुनाव आयोजित करने के लिए एक व्यापक कार्य योजना बनाने का निर्देश देने और पर्याप्त केंद्रीय बल तैनात करने की मांग की गई थी।
न्यायाधीश एल नागेश्वर राव और बीआर गवई की पीठ ने बंगाल भाजपा से कहा कि याचिका वापस लें और अपनी समस्या लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट जाएं। कोलकाता में निकाय चुनाव 19 दिसंबर को होने हैं। बंगाल भाजपा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कहा कि पार्टी अपनी उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे रही है और नामित किए गए लोगों को डराया जा रहा है।
'पहले हाईकोर्ट में दाखिल करनी चाहिए याचिका'
उन्होंने यह भी कहा कि शिकायतें करने के बावजूद पुलिस की ओर से कोई एफआईआर नहीं दर्ज की गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से सवाल किया, '32 किसलिए (संविधान की धारा 32 के तहत याचिका सीधे सुप्रीम कोर्ट में दायर की जाती है)? याचिका पहले हाईकोर्ट में दाखिल की जानी चाहिए थी जिसके पास वहां की सुरक्षा स्थिति और अन्य स्थानीय पक्षों के बारे में बेहतर जानकारी है।'
07 दिसंबर को सुनवाई के लिए जताई थी सहमति
पीठ ने कहा कि समस्या यह है कि अगर हम इस पर विचार करना शुरू करेंगे तो यह कभी खत्म नहीं होगा। इससे पहले सात दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर भाजपा की याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई थी। बंगाल भाजपा की ओर से यह याचिका प्रदेश अध्यक्ष और सांसद सुकांत मजुमदार ने दाखिल की थी और कोलकाता निकाय चुनाव को लेकर यह सभी मांगें उठाई थीं।
भाजपा के प्रत्याशियों को डराया-धमकाया जा रहा
अधिवक्ता आदित्य शर्मा और नचिकेता जोशी के जरिए दाखिल की गई इस याचिका में कहा गया है कि पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से कोलकाता नगर निगम चुनाल के लिए अधिसूचना जारी करने के बाद भाजपा अपने उम्मीदवारों की सूची को अंतिम रूप दे रही है। इसमें जिनके नाम शामिल हैं उनमें से कई को धमकाया गया और उम्मीदवारी वापस लेने के लिए दबाव बनाया गया।