सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सोमवार को एनजीओ आर्यावर्त महासभा फाउंडेशन के वकील पवन प्रकाश पाठक से कहा कि हाईकोर्ट स्थानीय स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है।
सुप्रीम कोर्ट ने छपरा जहरीली शराब त्रासदी की स्वतंत्र और एसआईटी जांच की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। त्रासदी में अब तक 40 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की इजाजत दी है।
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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में पिछले महीने जहरीली शराब त्रासदी की विशेष जांच दल (एसआईटी) से जांच कराने की मांग कर रहे एनजीओ को हाईकोर्ट जाने की हिदायत दी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ व जस्टिस पीएस नरसिम्हा की पीठ ने सोमवार को एनजीओ आर्यावर्त महासभा फाउंडेशन के वकील पवन प्रकाश पाठक से कहा कि हाईकोर्ट स्थानीय स्थिति से अच्छी तरह वाकिफ है।
पीठ ने कहा कि आपने जो भी राहत मांगी है, मसलन, घटना की एसआईटी जांच, अवैध शराब के निर्माण और व्यापार पर अंकुश लगाने के लिए राष्ट्रीय योजना और पीड़ितों को मुआवजा आदि को हाईकोर्ट में निपटाया जा सकता है। संबंधित हाईकोर्ट स्थानीय परिस्थितियों से अच्छी तरह से वाकिफ है। हाईकोर्ट के पास संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत व्यापक शक्तियां भी हैं।
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पाठक ने कहा कि देश में आए दिन जहरीली शराब की घटनाएं हो रही हैं और यह किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है। हालांकि पीठ उनकी दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई और उसने याचिकाकर्ता एनजीओ को याचिका वापस लेने और हाईकोर्ट जाने की स्वतंत्रता प्रदान कर दी। बिहार में हुई उस शराब त्रासदी में 40 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है।