सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के कुछ डॉक्टरों की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। याचिका दायर कर डॉक्टरों ने राज्य के बाहर पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स की पढ़ाई के लिए राज्य सरकार को एनओसी देने का निर्देश देने की गुहार लगाई थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि यह नीतिगत मामला है और फिलहाल हम इसमें दखल नहीं दे सकते।
जस्टिस नवीन सिन्हा और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने पाया कि याचिकाकर्ता डॉक्टरों ने न सिर्फ एनओसी की गुहार लगाई है बल्कि पॉलिसी को चुनौती दी है। दरअसल गत छह मई को कोरोना की दूसरी लहर के मद्देनजर उत्तर प्रदेश सरकार ने अधिसूचना जारी कर यह कहा था कि राज्य में कार्यरत डॉक्टर फिलहाल राज्य के बाहर आगे की पढ़ाई के लिए स्टडी लीव नहीं ले सकते।
पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ दवे से कहा कि वह हाईकोर्ट में राज्य सरकार की इस नीति को चुनौती दे सकते हैं। पीठ ने कहा कि अगर याचिका दायर की गई तो हम हाईकोर्ट से अनुरोध करते हैं कि इसका जल्द निपटारा किया जाए।
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश की ओर से पेश एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने पीठ से कहा कि कोरोना की स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार ने डॉक्टरों को बाहर जाकर पढ़ाई करने पर रोक लगाई है। राज्य सरकार का मानना है कि अभी डॉक्टरों की राज्य में बेहद आवश्यकता है। याचिकाकर्ता डॉक्टर एम्स में पढ़ाई के लिए एनओसी की मांग कर रहे थे।