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27 हफ्ते का गर्भ गिराने की इजाजत देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Mon, 27 Mar 2017 08:15 PM IST
amarujala.com- Presented by : मुकेश झा
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सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई की एक महिला के 27 हफ्ते के गर्भ को गिराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद शीर्ष अदालत ने यह निर्णय लिया। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने सवाल खड़ा किया कि आखिर गर्भ गिराने के मामले मुंबई से ही क्यों आ रहे हैं। न्यायमूर्ति एसए बोबडे और न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव की पीठ ने मुंबई के केईएम अस्पताल की मेडिकल टीम की रिपोर्ट में पाया कि बच्चा पैदा करने में महिला की जान को कोई खतरा नहीं है। साथ ही रिपोर्ट में कहा गया कि महिला के गर्भ में पल रहे बच्चे में कुछ शारीरिक अनियमितताएं हैं, लेकिन संभव है कि बच्चा जिंदा जन्म ले।
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मेडिकल टीम ने रिपोर्ट में कहा है कि 27 हफ्ते के गर्भ को गिराना उचित नहीं है। रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पीठ ने महिला को गर्भ गिराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। पीठ ने सवाल किया कि गर्भ गिराने के ऐसे मामले मुंबई से ही सामने क्यों आ रहे हैं? पिछले चार मामलों में ऐसा देखा गया है। पीठ ने कहा कि हर मामले में वकील भी समान हैं। पीठ ने सॉलिसिटर जनरल से इस बारे में गौर करने के लिए कहा है। पीठ ने इस संबंध में सॉलिसिटर जनरल को पैनल के गठन के मुद्दे पर बात करने के लिए भी कहा है।

मालूम हो कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी एक्ट, 1971 के प्रावधान के मुताबिक, गर्भधारण के 20 हफ्ते के बाद गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती, लेकिन अधिनियम की धारा-पांच में यह प्रावधान है कि अगर गर्भ के कारण महिला की जान को खतरा हो तो 20 हफ्ते के बाद महिला को गर्भपात कराने की इजाजत दी जा सकती है।
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