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SC/ST कानून के तहत अग्रिम जमानत पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

Tue, 27 Mar 2018 04:05 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court of India
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सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी कानून के तहत दो बिल्डरों को अग्रिम जमानत देने के गुजरात हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को लेकर पिछले हफ्ते आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर अग्रिम जमानत दी थी। 

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सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में एससी/एसटी काननू के तहत मिलने वाली शिकायत पर स्वत: एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी। साथ ही कहा था कि ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत पर पूरी तरह से रोक नहीं हो सकती और आरोपी अग्रिम जमानत के हकदार हैं।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने गुजरात हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर आरोपियों और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत दवे ने कहा कि उनके मुवक्किल जनजाति समुदाय से हैं और आरोपी बिल्डरों ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए उनकी जमीन हड़प ली थी। 
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आरोपियों को अग्रिम जमानत देने का फैसला गलत है। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगनी चाहिए, जिससे अन्य आरोपी इसका फायदा नहीं उठा पाएं।

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लोक जनशक्ति पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर की पुनर्विचार याचिका

केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के दल लोक जनशक्ति पार्टी ने सोमवार को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की है। याचिका में कहा गया है कि यह गंभीर मामला है, इसलिए इसे संविधान पीठ के पास भेजा जाना चाहिए। साथ ही पार्टी ने खुद को पक्षकार बनाने की भी अपील की है।

पार्टी नेता चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिखा है और उनसे सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की है। बिहार आधारित पार्टी का मुख्य वोट बैंक दलित ही हैं।
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