छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस के अध्यक्ष
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और जनता कांग्रेस के अध्यक्ष अजीत जोगी ‘आदिवासी’ ही बने रहेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने उनके अनुसूचित जनजाति का ही होने पर मुहर लगाते हुए छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के आदेश को दरनिकार करने से इनकार कर दिया है। साथ ही जस्टिस कूरियन जोसफ और जस्टिस संजय किशन कौल की पीठ ने उनके दर्जे को चुनौती देने वाले भाजपा नेता संत कुमार नेताम की याचिका को भी खारिज कर दिया।
दरअसल बिलासपुर जिले के संत कुमार नेताम ने वर्ष 2000 में अजीत जोगी के जातिगत दर्जे को चुनौती दी थी। उन्होंने जोगी के आदिवासी के बजाय ईसाई होने की शिकायत वाली याचिका अनुसूचित जनजाति आयोग को दी थी।
वर्ष 2001 में आयोग के सरकार से मामले की जांच को कहने पर जोगी ने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। इसके खिलाफ 2007 में नेताम की विशेष अनुमति याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को जांच के आदेश दिए थे। सरकार की उच्चस्तरीय समिति ने 2017 के जून में रिपोर्ट दी थी, जिसमें जोगी को कंवर जनजाति के बजाय ईसाई धर्म से संबंधित बताया गया था।
इस पर बिलासपुर जिला प्रशासन ने जोगी का जाति प्रमाण पत्र रद्द कर दिया था। इस फैसले को जोगी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस साल 30 जनवरी को हाईकोर्ट ने सरकार से नई समिति का गठन कर दोबारा जांच कराने को कहा था। उधर, संत कुमार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज करते हुए हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा है।