सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र के विशालगढ़ किले में दरगाह पर पशु वध पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। याचिका में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी। बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में विशालगढ़ किले में दरगाह पर ईद-उल-अजहा और उर्स पर पशु वध की अनुमति है। इस फैसले का विरोध करते हुए अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। अफसरों का कहना था कि किला एक संरक्षित स्मारक है।
सुप्रीम कोर्ट में न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के समक्ष याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया। वकील ने कहा कि कल बकरीद है और महाराष्ट्र के विशालगढ़ नामक संरक्षित स्मारक में उच्च न्यायालय ने वध की इजाजत दी है। उर्स के लिए भी 12 जून तक संरक्षित स्मारक क्षेत्र में भी पशु वध की अनुमति दी है।
ये भी पढ़ें: 266 KMPH के तूफान से लेकर भूकंप-धमाके तक बेअसर, जानें चिनाब ब्रिज में और क्या खास
इस पर पीठ ने कहा कि कई संरक्षित स्मारकों में बहुत सारी धार्मिक गतिविधियां चल रही हैं। न्यायमूर्ति करोल ने कहा कि त्रिपुरा उच्च न्यायालय में बैठते हुए मैंने वहां पशु वध पर प्रतिबंध लगा दिया था और फिर इस न्यायालय ने आदेश को संशोधित करते हुए कहा कि पशु वध एक बंद स्थान में किया जाएगा।
वकील ने दावा किया कि महाराष्ट्र ने अधिसूचना में कहा है कि संरक्षित क्षेत्र में पशुओं का वध नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि पिछले साल जो प्रतिबंध थे, वे इस साल भी लागू रहेंगे। वकील ने पीठ से मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आग्रह किया। इस पर पीठ ने कहा कि इसमें जल्दबाजी क्यों है? यह मामला निरर्थक हो जाएगा।
हाईकोर्ट ने आदेश में यह कहा था
बॉम्बे हाईकोर्ट की अवकाश पीठ ने हजरत पीर मलिक रेहान दरगाह ट्रस्ट की पशुओं के वध की अनुमति मांग करने वाली याचिका पर सुनवाई की थी। हाईकोर्ट ने सात जून को मनाई जाने वाली ईद-उल-अजहा और विशालगढ़ किले में स्थित दरगाह पर 8 से 12 जून तक आयोजित होने वाले चार दिवसीय उर्स (मेले) के लिए पशु वध की अनुमति दी थी।
ये भी पढ़ें: 'राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभा रहे युवा', NDA के 11 साल पूरे होने पर पीएम मोदी का संदेश
न्यायालय ने कहा था कि यह आदेश न केवल दरगाह ट्रस्ट पर लागू होगा, बल्कि अन्य श्रद्धालुओं पर भी लागू होगा। पिछले वर्ष भी इसी प्रकार की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने कहा था कि पिछले वर्ष लगाई गई शर्तें जैसे कि पशु वध केवल निजी और बंद स्थान, विशेष रूप से गेट नंबर 19 पर, जो मुबारक उस्मान मुजावर के निजी स्वामित्व में है, तथा सार्वजनिक क्षेत्रों में नहीं किया जाना, इस वर्ष भी लागू रहेंगी।