फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Supreme Court: 'सेवानिवृत्त कर्मी की ग्रेच्युटी से राशि वसूली जायज नहीं', अदालत ने अपीलकर्ता को दी बड़ी राहत

Sun, 17 Aug 2025 11:19 PM IST
हिमांशु चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से वसूली करना गलत है। कमलेश टुटेजा के मामले में कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का फैसला रद्द करते हुए कहा कि राज्य सरकार ग्रेच्युटी से कोई रकम नहीं काट सकती। टुटेजा से पहले 75,720 रुपये काटे गए थे और 5.74 लाख रुपये की वसूली की कोशिश हुई थी, लेकिन निचली अदालतों ने पहले ही सरकार की कार्रवाई खारिज कर दी थी।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में साफ कर दिया है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी की ग्रेच्युटी से किसी भी तरह की वसूली करना गैरकानूनी है, खासकर तब जब इसी वसूली को लेकर पहले ही अदालतें राज्य सरकार की कार्रवाई को खारिज कर चुकी हों। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने कमलेश टुटेजा नामक अपीलकर्ता की याचिका स्वीकार करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया। हाईकोर्ट ने उनकी याचिका को देर से दाखिल करने और लापरवाही बताते हुए खारिज कर दिया था।
विज्ञापन


कमलेश टुटेजा पंजाब लघु उद्योग एवं निर्यात निगम लिमिटेड में मैनेजर के पद पर कार्यरत थे, 30 अप्रैल 2010 को रिटायर हुए। उन्हें सेवानिवृत्ति पर 6.50 लाख रुपये की ग्रेच्युटी दी गई, लेकिन इसमें से 75,720 रुपये काट लिए गए। इसके अलावा राज्य सरकार ने 5.74 लाख रुपये (ब्याज सहित) की वसूली के लिए चंडीगढ़ की सिविल कोर्ट में केस दायर किया। हालांकि यह केस 2015 में खारिज हो गया। राज्य सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पहली और दूसरी अपील की, लेकिन दोनों ही अपील खारिज हो गईं।

ग्रेच्युटी की सीमा और विवाद का कारण
दरअसल, अगस्त 2009 में सरकार ने ग्रेच्युटी की सीमा 3.50 लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये कर दी थी। विवाद इस बात पर हुआ कि यह नया आदेश कब से लागू होगा। टुटेजा का कहना था कि नियम अगस्त 2009 से लागू हुआ है, जबकि राज्य सरकार का दावा था कि यह मई 2010 से लागू होगा। इस विवाद के चलते राज्य सरकार ने वसूली का प्रयास किया। लेकिन अदालतों ने साफ कर दिया कि सरकार कर्मचारी की ग्रेच्युटी से किसी भी तरह की राशि वापस नहीं ले सकती।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- पहले सांसद, फिर राज्यपाल और अब उपराष्ट्रपति की रेस में... ऐसा है सीपी राधाकृष्णन का सफरनामा

हाईकोर्ट का फैसला और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने टुटेजा की याचिका को देरी और लापरवाही का हवाला देते हुए खारिज कर दिया था। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को गलत ठहराया। शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिका दाखिल करने का असली कारण तभी पैदा हुआ था, जब वसूली की प्रक्रिया समाप्त होकर दूसरी अपील भी खारिज हुई। इसलिए टुटेजा की याचिका को खारिज करने का आधार बिल्कुल अनुचित था।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- तमिलनाडु में 93 दिनों में 19000 किमी का सफर, नदियों को जोड़ने की पहल; OBC समुदाय से आते

सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश और राहत
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि राज्य सरकार की कार्रवाई पहले ही अदालतों द्वारा खारिज की जा चुकी है, इसलिए ग्रेच्युटी से कोई भी राशि नहीं काटी जा सकती। अदालत ने टुटेजा को राहत देते हुए साफ किया कि ग्रेच्युटी कर्मचारी का अधिकार है और इसमें से रकम काटना अन्यायपूर्ण है। यह फैसला उन सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है, जिनकी ग्रेच्युटी से सरकार या संस्थान किसी कारण से वसूली करने की कोशिश करते हैं।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें