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SC: 'खिलाड़ियों कों ऐसे प्रोत्साहित करते हैं?', सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल सरकार को क्यों लगाई फटकार, जानें मामला

Thu, 28 Nov 2024 02:55 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से नाराजगी जाहिर की। बेंच ने कहा, "क्या आप इस तरह खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रहे? 
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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'क्या आप इस तरह खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हैं?' सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कुछ इसी तरह फटकार लगाते हुए हिमाचल प्रदेश सरकार से सवाल किए। दरअसल, मामला 2014 के एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ी पूजा ठाकुर से जुड़ा है, जिन्हें राज्य सरकार में नौकरी के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ीं। इसके बावजूद उन्हें कथित तौर पर नौकरी देने से इनकार कर दिया गया।
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सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से नाराजगी जाहिर की। बेंच ने कहा, "क्या आप इस तरह खिलाड़ियों को प्रोत्साहित कर रहे? किसी ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। आपके मुख्यमंत्री को व्यवहारिक दृष्टिकोण रखना चाहिए। लेकिन खिलाड़ियों के मामले में आपका दृष्टिकोण यह है।"

पूजा ठाकुर ने दक्षिण कोरिया के इंचियॉन में 2014 में हुए एशियाई खेलों के कबड्डी इवेंट में स्वर्ण पदक जीता था। उन्हें 2015 के राष्ट्रीय खेलों में भी रजत पदक मिला था। इसके बाद जुलाई 2015 में ठाकुर ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को आवेदन भेजकर नौकरी की मांग की थी। ठाकुर को हाईकोर्ट के आदेश पर सरकार में आबकारी और कराधान अफसर के तौर पर नियुक्ति मिली थी।
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हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी राज्य सरकार
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच की तरफ से 2023 में नियुक्ति का आदेश दिए जाने के बावजूद राज्य सरकार ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट के सामने उठाया। इससे पहले हाईकोर्ट की ही एकल जज की पीठ ने भी ठाकुर की नियुक्ति को सही ठहराया था। मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने कहा था कि पूजा ठाकुर आवेदन की तारीख से ही वरिष्ठता समेत सभी लाभ पाने की हकदार हैं। 

हाईकोर्ट ने पाया कि राज्य के अधिकारी इस बात से खुश नहीं थे कि पूजा ठाकुर क्लास-1 नौकरी के लिए अपनी नियुक्ति की मांग को लेकर उनके पास दो ओरिजिनल एप्लीकेशन लेकर पहुंचीं। इसे लेकर अफसर नाराज थे। 

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा, "यह बात बेवजह की है कि हाईकोर्ट के फैसले के बावजूद अपीलकर्ताओं की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर ठाकुर को मिलने वाले लाभों को रोकने की मांग की गई।"
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