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Supreme Court: केरल ड्राफ्ट मतदाता सूची विवाद पर 'सुप्रीम' फैसला, आयोग को सूची सार्वजनिक करने का दिया निर्देश

Thu, 15 Jan 2026 05:21 PM IST
शुभम कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केरल ड्राफ्ट मतदाता सूची विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। इसके तहत कोर्ट ने चुनाव आयोग को केरल की एसआईआर प्रक्रिया में कटे नामों को सार्वजनिक करने और आपत्ति दर्ज कराने की तिथि बढ़ाने का निर्देश दिया है। 

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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने केरल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद ड्राफ्ट मतदाता सूची में कटे नामों को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने इसके मकसद पर जोर देते हुए बताया कि इसका मकसद यह है कि प्रभावित मतदाता अपने नाम हटाए जाने के खिलाफ आपत्ति दर्ज कर सकें। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने निर्वाचन आयोग से यह भी कहा कि नाम हटाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराने की अंतिम तिथि बढ़ाने पर विचार किया जाए, और संभव हो तो इसे दो हफ्ते बढ़ाया जाए।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में केरल की एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ कई याचिकाओं की सुनवाई हुई। याचिकाकर्ताओं में आईयूएमएल के वरिष्ठ नेता पीके कुनहलीकुट्टी सीपीआई-एम के एमवी गोविंदन मास्टर, सीपीआई के सनी जोसेफ और सीपीआई राज्य परिषद शामिल हैं। याचिकाओं में कहा गया कि वर्तमान में की गई एसआईआर प्रक्रिया तकनीकी गलतियों और मजबूत शिकायत निवारण तंत्र की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोगों को मताधिकार से वंचित कर सकती है।

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सूची से हटाए गए 24 लाख नाम
मामले में याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने बताया कि संशोधित ड्राफ्ट सूची में लगभग 24 लाख नाम हटाए गए हैं। जबकि मतदाता आपत्ति दर्ज कर सकते हैं, हटाए गए लोगों की सूची उपलब्ध नहीं कराई गई है। इसके कारण प्रभावित मतदाता यह जानने में असमर्थ हैं कि उनका नाम क्यों हटाया गया और वे आपत्ति कैसे दर्ज कराएं। कुछ मामलों में मतदाताओं को मृत दिखाया गया है या उन्हें राज्य के बाहर के रूप में चिह्नित किया गया है। इस पारदर्शिता की कमी से ग्रामीण क्षेत्रों के मतदाताओं को काफी कठिनाई हो रही है।
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कोर्ट ने वेबसाइट पर अपलोड करने का दिया निर्देश

इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि यह सूची अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है, तो इसे ग्राम पंचायत कार्यालय या गांवों में किसी अन्य सार्वजनिक कार्यालय में प्रदर्शित किया जाना चाहिए। साथ ही इसे आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जाए ताकि अधिक से अधिक लोग इसे देख सकें। सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से यह भी कहा कि मतदाताओं की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए आपत्ति दर्ज कराने की तारीख बढ़ाने पर विचार किया जाए।

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