सुप्रीम कोर्ट ने
यूआईडीएआई से देश के नागरिकों का मेटा डाटा एकत्रित करने पर सवाल उठाया है। अदालत ने प्राधिकरण से पूछा कि आधार के प्रमाणीकरण के लिए लोगों के व्यक्तिगत लेनदेन वाले मेटा डाटा को एकत्रित करने की क्या जरूरत है।
जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों वाली संविधान पीठ आधार को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं की सुनवाई कर रही है। यूआईडीएआई ने पीठ के समक्ष सीमित तकनीकी मेटा डाटा एकत्रित किए जाने की बात स्वीकार की।
इस पर पीठ ने प्राधिकरण से पूछा आपको आधार प्रमाणीकरण के दौरान लोगों द्वारा दी जाने वाली व्यक्ति लेनेदेन की जानकारी वाला मेटा डाटा रखने की जरूरत क्यों हैं? मेटा डाटा उन डाटा का समूह है जो अन्य डाटा के बारे में सूचना व विवरण देते हैं। वहीं याचिकाकर्ताओं का कहना है कि प्राधिकरण का मेटा डाटा पर इतना नियंत्रण है कि उससे निगरानी की आशंका बढ़ जाती है।