जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 'नियम वो हैं, जो हम तय करते हैं। ये संवैधानिक आदेश नहीं है। हम इस नियम के पीछे के तथ्य से सहमत नहीं हैं। आप कैसे नियमों के आधार पर किसी को विशेष पेंशन और परिवार पेंशन से वंचित कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता और एयरफोर्स दोनों के वकील संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए।'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वह इस पर विचार करेगा कि क्या वायुसेना के नियमों के तहत सौतेली मां को परिवार को मिलने वाली पेंशन मिल सकती है या नहीं। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने वायुसेना द्वारा सौतेली मां को पेंशन देने से इनकार करने पर नाराजगी भी जाहिर की। पीठ ने कहा कि मां एक विस्तृत शब्द है। आज जब दुनिया में काफी कुछ घटित हो रहा है तो ऐसा नहीं है कि सिर्फ जैविक मां ही बच्चों का लालन-पालन कर रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट ने जताई नाराजगी
जस्टिस सूर्यकांत ने वायुसेना के वकील से पूछा कि 'उदारण के लिए, अगर कोई बच्चा पैदा होता है और उसकी जैविक मां की मौत हो जाती है और पिता दूसरी शादी कर लेते हैं। ऐसे में सौतेली मां बच्चे को बचपन से ही पालेगी और अगर वह सेना का अधिकारी बन जाता है तो अगर सौतेली मां ने उसे पाला है तो वह उसकी मां होगी या नहीं?' सुनवाई के दौरान वायुसेना के वकील ने कहा कि ऐसे कई फैसले हैं, जिनमें सौतेली मां को परिवार की पेंशन से बाहर रखा गया है।
7 अगस्त तक टाली सुनवाई
इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि 'नियम वो हैं, जो हम तय करते हैं। ये संवैधानिक आदेश नहीं है। हम इस नियम के पीछे के तथ्य से सहमत नहीं हैं। आप कैसे नियमों के आधार पर किसी को विशेष पेंशन और परिवार पेंशन से वंचित कर सकते हैं।' सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर याचिकाकर्ता और एयरफोर्स दोनों के वकील संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इस पर पीठ ने कहा कि वकील पूरी तरह तैयारी करके नहीं आए हैं और उन्हें अदालतों के आदेशों का फिर से अध्ययन करके आने का निर्देश दिया। इसके बाद मामले की सुनवाई 7 अगस्त तक टाल दी गई।
वायुसेना के इनकार के बाद सौतेली मां ने किया सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने जयश्री की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये टिप्पणी की। जयश्री ने अपने सौतेले बेटे हर्ष की जैविक मां की मौत के बाद हर्ष का लालन-पालन किया था। हर्ष बड़ा होने के बाद भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ। हर्ष की मौत के बाद जयश्री ने पेंशन देने का दावा किया, लेकिन वायुसेना ने सौतेली मां को पेंशन देने से इनकार कर दिया। मामला सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल पहुंचा, जहां10 दिसंबर 2021 में सशस्त्र बल ट्रिब्यूनल ने भी अपने फैसले में सौतेली मां को बेटे की पेंशन देने से मना कर दिया। इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।