देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में उत्तर प्रदेश सरकार को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने प्राकृतिक गैस पर राज्य द्वारा लगाए गए वैट (VAT) को अवैध करार देते हुए सरकार की सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया। यह मामला आंध्र प्रदेश के KG-D6 बेसिन से पाइपलाइन के जरिए उत्तर प्रदेश तक पहुंचाई जाने वाली प्राकृतिक गैस पर टैक्स लगाने से जुड़ा था।
सुप्रीम कोर्ट का तर्क: यह अंतर-राज्यीय बिक्री है
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल एस चंदुरकर की पीठ ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि यह मामला अंतर-राज्यीय बिक्री (Inter-State Sale) के अंतर्गत आता है और इस पर राज्य सरकार VAT नहीं लगा सकती। अदालत ने कहा कि जब किसी अनुबंध के तहत वस्तु का परिवहन एक राज्य से दूसरे राज्य में होता है, तो वह केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम (CST Act) के तहत आता है।
संविधान और संघीय ढांचे का हवाला
अपने 94 पन्नों के विस्तृत फैसले में कोर्ट ने कहा कि भारत एक संघीय ढांचा है, जहां राज्यों के बीच आर्थिक असमानता मौजूद है। अदालत ने यह भी कहा कि संविधान इस बात की व्यवस्था करता है कि अंतर-राज्यीय व्यापार और कराधान का अधिकार केंद्र सरकार के पास रहे ताकि व्यापार में बाधा न आए।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि पाइपलाइन में गैस अपरिभाषित हो जाती है। कोर्ट ने कहा कि कर कानूनों की व्याख्या सख्ती से की जानी चाहिए और शब्दों का अर्थ बढ़ाया या घटाया नहीं जा सकता।
किस कंपनी से जुड़ा था मामला?
संविधान के अनुच्छेद 269 और 286 का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि अंतर-राज्यीय व्यापार पर कर लगाने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है, न कि राज्यों के पास।इसलिए राज्य सरकार द्वारा लगाया गया VAT संविधान के खिलाफ है। यह विवाद रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और टाटा केमिकल्स तथा इफको जैसे बड़े खरीदारों से जुड़ा था, जो KG-D6 बेसिन से गैस खरीदते हैं।
क्या था पूरा मामला?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब उत्तर प्रदेश सरकार ने दावा किया कि राज्य के भीतर उपयोग होने वाली प्राकृतिक गैस पर 21 प्रतिशत वैट लगाया जा सकता है। गैस बिक्री समझौते (GSPA) के अनुसार गैस का 'डिलीवरी पॉइंट' आंध्र प्रदेश के गादीमोगा में तय था, जहां से गैस विभिन्न राज्यों से होते हुए उत्तर प्रदेश तक पहुंचती थी। हालांकि राज्य कर विभाग का तर्क था कि पाइपलाइन में गैस अन्य स्रोतों के साथ मिल जाती है, इसलिए अंतिम उपयोग के समय इसे स्थानीय बिक्री माना जाना चाहिए।