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नौसेना की दस महिला अधिकारियों की सेवा मुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई अंतरिम रोक

Thu, 31 Dec 2020 03:40 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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भारतीय नौसेना की महिला अधिकारी (फाइल फोटो) - फोटो : Twitter
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार से स्थायी कमीशन की मांग करने वाली 10 महिला नौसेना अधिकारियों को फिलहाल सेवा से मुक्त नहीं करने को कहा है। ये 10 महिला अधिकारी 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाली थीं। इसे लेकर दो याचिकाएं दायर की गई थीं।

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जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अनिरुद्ध बोस की अवकाश पीठ ने महिला अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई कर इन सभी अधिकारियों की 31 दिसंबर को सेवामुक्ति पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों ही याचिकाओं पर केंद्र व नौसेना प्रमुख से जवाब मांगा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान ऐनी नागराज व अन्य महिला अधिकारियों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मीनाक्षी अरोड़ा ने पीठ को बताया कि सेना की कुछ महिला अधिकारियों की इसी तरह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 जनवरी को विचार करेगा।


उन्होंने महिला अधिकारियों को सेवा से मुक्त करने के 18 दिसंबर के आदेश पर रोक लगाने की गुहार की। जिसके बाद पीठ ने इस याचिका को उस मामले के साथ जोड़ दिया, जिस पर 19 जनवरी को सुनवाई होनी है। साथ ही पीठ ने इन अधिकारियों को 31 दिसंबर को सेवा से मुक्त करने के आदेश पर रोक लगा दी है।
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वहीं अवकाशकालीन पीठ ने शिबू देवेसिया व अन्य महिला अधिकारियों की एक दूसरी याचिका को नियमित पीठ के समक्ष चार जनवरी के लिए सूचीबद्ध करने का आदेश दिया है। पीठ ने 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त होने वाली इन अधिकारियों को भी मुक्त नहीं करने को कहा है।

बता दें कि 17 मार्च 2020 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद, शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के विषय में भारतीय नौसेना ने 18 दिसंबर को स्थायी कमीशन के लिए चयन प्रक्रिया पूरी कर ली। इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कुल 80 एसएससी अधिकारियों को रिक्तियों के आधार पर स्थायी कमीशन दिया गया है। इस सूची में 39 पुरुष और 41 महिला अधिकारी शामिल हैं।

इससे क्या बदलाव होंगे
स्थायी कमीशन दिये जाने का मतलब यह है कि महिला सैन्य अधिकारी अब रिटायरमेंट (सेनानिवृत्ति) की उम्र तक सेना में काम कर सकती हैं। अगर वे चाहें तो पहले भी नौकरी से इस्तीफा दे सकती हैं। अब तक शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत सेना में नौकरी कर रही महिला अधिकारियों को अब स्थायी कमीशन चुनने का विकल्प दिया जाएगा। स्थायी कमीशन के बाद महिला अधिकारी पेंशन की भी हकदार हो जाएंगी।

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