स्टर्लिंग बायोटेक मामले का सुप्रीम कोर्ट ने किया समापन, 9,800 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज
सुप्रीम कोर्ट ने स्टर्लिंग बायोटेक से जुड़े बहुचर्चित मामले को अंतिम रूप से समाप्त करते हुए लगभग 9,800 करोड़ रुपये की कुल वसूली दर्ज की है। अदालत ने कहा कि अब इस मामले में आगे कार्यवाही जारी रखने का कोई औचित्य नहीं बचता, इसलिए सभी संबंधित मामलों को खत्म किया जाता है।
यह मामला सीबीआई की एफआईआर से शुरू हुआ था, जिसमें 5,383 करोड़ रुपये के बकाये का आरोप था। सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष बताया गया कि 3,507 करोड़ रुपये पहले ही बैंकों को लौटाए जा चुके हैं, जबकि 1,192 करोड़ रुपये परिसंपत्तियों की बिक्री से वसूले गए। इसके अलावा 5,111.43 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जमा कराई गई, जिससे कुल वसूली बढ़कर लगभग 9,800 करोड़ रुपये हो गई।
जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने कहा कि सुरक्षित ऋणदाताओं को पूरी तरह संतुष्ट कर दिया गया है। इसी आधार पर ईडी, गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) और सीबीआई से जुड़े सभी मामलों को भी समाप्त करने का निर्देश दिया गया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा। 13 अप्रैल 2026 को 45.70 लाख रुपये की अंतिम राशि जमा होने के साथ ही सभी औपचारिकताएं पूरी हो गईं और मामला पूरी तरह समाप्त घोषित कर दिया गया।
बैंक ग्राहकों के प्रतिनिधि, समय पर चेक पेश न करना सेवा में कमी : सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। उन पर उचित सावधानी बरतने और चेक के पुराने होने से पहले उसे भुगतान के लिए प्रस्तुत करना उनका वैधानिक दायित्व है। अगर वे पुराने चेक को भुगतान करते हैं तो इसे सेवा में कमी माना जाएगा।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने केनरा बैंक को वैध अवधि के भीतर चेक प्रस्तुत न करने के लिए सेवा में कमी का दोषी ठहराया और शिकायतकर्ताओं को दिए गए मुआवजे को कम कर दिया। यह फैसला राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (एनसीडीआरसी) के निर्णय के खिलाफ केनरा बैंक की अपील पर आया है। आयोग ने ग्राहक कविता चौधरी के पक्ष में फैसला सुनाया था। यह विवाद मई 2018 में तब शुरू हुआ जब कविता और प्रिया चौधरी ने लगभग 1.06 करोड़ रुपये के दो चेक अपने केनरा बैंक खातों में जमा किए। बैंक ने इन चेकों को उनकी वैधता अवधि के बाद पेश किया, जो खारिज हो गए थे।
आयोग ने इसे बैंक की कमी मानते हुए ग्राहक को चेक के मूल्य के 10 फीसदी धनराशि 8 फीसदी ब्याज के साथ हर्जाने के रूप में देने को कहा। शीर्ष अदालत ने बैक की लापरवाही तो मानी, लेकिन जुर्माने की रकम को 6 फीसदी और ब्याज दर को भी 6 फीसदी कर दिया। इसके अलावा, ग्राहकों को मुकदमेबाजी लागत के रूप में 50,000 रुपये का भुगतान करने के आयोग के आदेश को बरकरार रखा।