मुख्य न्यायाधीश ने कहा, “न्यायपालिका के पास कौन सी जादुई छड़ी है? हमें पता है कि दिल्ली-एनसीआर के लिए यह स्थिति खतरनाक है। समस्या सबको पता है, मुद्दा यह है कि समाधान क्या हैं। हमें इसकी वजहें पहचाननी होंगी और इसका हल तो विशेषज्ञ ही दे सकते हैं। हम आशा करते हैं कि लंबी अवधि तक प्रभावी समाधान खोजे जाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा, “हमें बताइए कि हम क्या निर्देश दे सकते हैं? क्या कोई निर्देश देकर हम तुरंत स्वच्छ हवा मिल सकती है? हर क्षेत्र के हालात अलग हैं। देखते हैं कि सरकार ने समितियों के स्तर पर क्या कदम उठाए हैं। यह मामला दीपावली के आसपास औपचारिक तौर पर भी सूचीबद्ध होता है, लेकिन इसकी नियमित निगरानी अब जरूरी है।”
Delhi Pollution: दिल्ली-एनसीआर से हटा GRAP-3, दूसरे और पहले चरण की पाबंदियां रहेंगी सख्ती से लागू
बता दें कि 19 नवंबर को अदालत ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) से कहा था कि दिल्ली-एनसीआर के स्कूलों में नवंबर-दिसंबर में खुले मैदान पर होने वाले खेल आयोजनों को सुरक्षित महीनों तक टालने पर विचार किया जाए। इस दौरान वायु की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पाई गई थी। दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने पूरे साल ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) लागू करने के सुझाव को अस्वीकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा कि यह आपातकालीन ढांचा जरूरत से ज्यादा प्रदूषण होने की स्थिति में कुछ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाता है। अदालत ने इसके बजाय दीर्घकालिक और टिकाऊ समाधानों पर जोर दिया था।
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