सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को न्यूज पोर्टल द वायर और उसकी पत्रकार रोहिणी सिंह को गुजरात हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दाखिल याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। करीब डेढ़ वर्ष से लंबित पड़ी इस याचिका में पोर्टल ने गृह मंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह की तरफ से दाखिल मानहानि के मुकदमे को निरस्त करने की गुहार लगाई थी।
जय शाह ने द वायर में रोहिणी सिंह की तरफ से लिखे एक लेख के खिलाफ गुजरात हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल की थी। शीर्ष अदालत ने निचली अदालत को भी द वायर और उसकी पत्रकार के खिलाफ चल रहे मुकदमे को जल्द से जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने द वायर की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने याचिका वापस लेने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि उनके वादी गुजरात की अदालत में ट्रायल झेलना चाहते हैं।
पीठ ने न्यूज पोर्टल को याचिका वापस लेने की इजाजत दे दी। हालांकि इससे पहले सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस भी हुई। जस्टिस मिश्रा के अतिरिक्त जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीआर गावई की मौजूदगी वाली पीठ ने कहा कि हम बहुत कुछ कहना चाहते है, लेकिन हम कहेंगे नहीं। इस पर सिब्बल ने कहा कि वह भी कुछ कहना चाहते हैं, लेकिन वह भी नहीं कहेंगे।
पत्रकारिता के चलन पर भी की तीखी टिप्पणी
पीठ ने देश में पत्रकारिता के वर्तमान चलन को लेकर भी बेहद नाराजगी जताते हुए कठोर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि यह फैशन बन गया है कि किसी भी व्यक्ति से जवाब मांगने के लिए नोटिस जारी किया जाए और 5-6 घंटे में ही उसके जवाब देने से पहले कोई भी लेख प्रकाशित कर दिया जाए। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि उचित वक्त पर इस मसले पर विचार किया जाएगा।