अदालत ने मामले की सुनवाई दो महीने के लिए स्थगित कर दी। घोष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज किशन कौल ने कहा कि न्यायालय पूर्व आईपीएस अधिकारी को सुरक्षा देता रहा है, लेकिन बंगाल की सत्तारूढ़ टीएमसी से त्यागपत्र देने के बाद उनके खिलाफ कई मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अदालत ने राज्य की ताकत से 2019 में उन्हें सुरक्षा देते हुए कहा था कि उनसे लोकसभा चुनाव के बाद पूछताछ की जाएगी।
भाजपा ने भारती घोष को पश्चिम मेदिनीपुर जिले की डेबरा सीट पर तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी हुमायूं कबीर के खिलाफ चुनाव मैदान में उतारा है। कबीर भी भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के अधिकारी रह चुके हैं। उल्लेखनीय है कि एक समय में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी माने जाने वाली घोष ने दावा किया कि पुलिस ने उनके खिलाफ एक दर्जन से अधिक प्राथमिकी दर्ज की है।
कौल ने कहा कि एक अन्य मामले में उनके और उनकी सुरक्षा कर रहे सीआईएसएफ अधिकारियों के खिलाफ एक कथित उत्पीड़न मामले में पूर्व अनुमति लिए बिना कार्यवाही शुरू की गई। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता को उनके खिलाफ दर्ज विभिन्न प्राथमिकियों के संबंध में 2019 से कई बार पूछताछ के लिए बुलाया गया और एक मामले में उनके पति को भी आरोपी बनाया गया, जिसमें शीर्ष अदालत ने उन्हें राहत दी थी।
कौल ने अनुरोध किया कि प्राथमिकी रद्द करने संबंधी उनकी याचिका की सुनवाई पूरी की जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बीच किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से छूट और अपना नामांकन दायर एवं राज्य विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
इसके बाद पीठ ने बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा से पूछा कि जब शीर्ष अदालत ने कुछ मामलों में याचिकाकर्ता को सुरक्षा प्रदान की है, तो राज्य उन्हें गिरफ्तार क्यों करना चाहता है। लूथरा ने कहा कि घोष ने एक मामले में निचली अदालत के समक्ष पेश नहीं होने का फैसला किया और उन्हें वारंट रद्द करने का अनुरोध करने के लिए उस अदालत में जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि घोष को जांच के दौरान कभी गिरफ्तार नहीं किया गया और उनके खिलाफ दंडात्मक प्रक्रिया अदालत ने शुरू की है, पुलिस ने नहीं। पीठ ने कहा कि घोष को पिछले लोकसभा चुनाव में कथित हिंसा को लेकर दर्ज प्राथमिकी के संबंध में चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए।
शीर्ष अदालत ने घोष को गिरफ्तारी से सुरक्षा देने की याचिका स्वीकार कर ली और कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम आने तक उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट स्थगित किया जाना चाहिए। घोष ने अपने खिलाफ जारी गिरफ्तारी वारंट पर रोक लगाने और 2019 लोकसभा चुनाव में हिंसा के संबंध में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कराने के लिए सोमवार को उच्चतम न्यायालय का रुख किया था।
घोष ने याचिका में कहा था कि 19 फरवरी 2019 को उनके खिलाफ दर्ज सिलसिलेवार झूठे मामलों में शीर्ष न्यायालय ने उन्हें किसी तरह की कठोर कार्रवाई से राहत प्रदान की थी, इसके बावजूद भी उन्हें नए मामलों में फंसाया जा रहा है। घोष ने कहा कि वह पिछले लोकसभा चुनाव में घाटल से भाजपा उम्मीदवार थीं, तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने उन पर हर मतदान केंद्र पर हमला किया और पुलिस मूकदर्शक बनी रही।