सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका को लेकर केंद्र और भारतीय चिकित्सा संघ को नोटिस जारी किया। जिसमें डॉक्टरों के हड़ताल पर जाने और चिकित्सा एवं आपातकालीन सेवाओं पर हड़ताल के प्रभाव को लेकर डॉक्टरों को उत्तरदायी बनाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसका प्रयास गंभीर रूप से बीमार रोगियों के इलाज के रखरखाव के लिए होगा। नागरिकों के हड़ताल करने के अधिकार को मान्यता देते हुए, अदालत ने कहा कि वह उन गंभीर रूप से बीमार रोगियों और आईसीयू में भर्ती मरीजों के लिए सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र विकसित करना चाहेगा।
जुलाई में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने डॉक्टरों और अन्य चिकित्सा पेशेवरों के खिलाफ हिंसा की जांच के लिए एक केंद्रीय कानून का मसौदा तैयार करने का काम आठ सदस्यीय उप-समिति को सौंपा था। इसकी मांग चिकित्सा बिरादरी द्वारा लंबे समय से चली आ रही थी।
इस पैनल में स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारी और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), एम्स आरडीए के प्रतिनिधि शामिल हैं।