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SC: भाजपा सांसद निशिकांत दुबे की बढ़ेंगी मुश्किलें! सुप्रीम कोर्ट अवमानना मामले पर जल्द आदेश जारी करेगा

Mon, 05 May 2025 03:37 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल) - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर कहा है कि वे जल्द ही भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ आदेश जारी करेंगे। दरअसल याचिका में अदालत की अवमानना करने के आरोप में भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका तो खारिज कर दी, लेकिन साफ कर दिया कि वे जल्द ही आदेश जारी करेंगे। याचिका खारिज करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हम जल्द ही इस पर आदेश पारित करेंगे, लेकिन हम इस याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने बीते दिनों अपने एक बयान में कहा था कि देश में जितने भी गृहयुद्ध हो रहे हैं, उनके लिए मुख्य न्यायाधीश जिम्मेदार हैं। भाजपा सांसद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट देश में धार्मिक युद्ध भड़काने के लिए जिम्मेदार है। 
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दरअसल सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिनों एक निर्देश जारी किया था कि राष्ट्रपति को एक तय समय के भीतर विधेयक पर फैसला लेना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्देश की आलोचना करते हुए भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने सुप्रीम कोर्ट की भूमिका पर सवाल आया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा एक पोस्ट में लिखा था कि अगर कोर्ट ही कानून बनाएगा तो संसद को बंद कर देना चाहिए। 

यूट्यूब चैनल ‘4पीएम’ पर रोक मामले में 'सुप्रीम' जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को यूट्यूब चैनल ‘4पीएम’ पर रोक लगाने के सरकार के आदेश को रद्द करने के अनुरोध वाली वाली याचिका पर केंद्र और अन्य से जवाब मांगा। शीर्ष अदालत में दायर याचिका में दावा किया गया है कि मध्यस्थ ने केंद्र सरकार की ओर से कथित रूप से जारी उस गोपनीय निर्देश के तहत चैनल को ब्लॉक किया है जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के अस्पष्ट आधार का हवाला दिया गया है।

न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जतायी और केंद्र तथा अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। डिजिटल समाचार मंच '4पीएम' के संपादक संजय शर्मा ने यह याचिका दायर की है। उनके इस चैनल 73 लाख सब्सक्राइबर हैं। उन्होंने याचिका में आरोप लगाया गया है कि इसे ब्लॉक करना पत्रकारिता की स्वतंत्रता पर और जनता के सूचना प्राप्त करने के अधिकार पर एक भयानक हमला है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि चैनल को ब्लॉक करने से जुड़ा आदेश पारित करने से पहले याचिकाकर्ता को कोई नोटिस जारी नहीं किया गया। सिब्बल ने कहा, पूरा चैनल बिना किसी कारण के ब्लॉक कर दिया गया है। उन्होंने कहा, मेरे पास केवल मध्यस्थ से मिली जानकारी है। उन्होंने कहा, पहली नजर में यह असंवैधानिक है। पीठ ने याचिका पर नोटिस जारी करते हुए कहा कि मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी।

महाराष्ट्र के डीजीपी एसआईटी गठित करेंगे- सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि महाराष्ट्र के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बदलापुर यौन उत्पीड़न मामले के आरोपी अक्षय शिंदे की हिरासत में मौत के लिए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए एक एसआईटी गठित करेंगे। ठाणे जिले के बदलापुर के एक स्कूल में दो नाबालिग लड़कियों के साथ यौन उत्पीड़न के आरोपी शिंदे को कथित तौर पर 23 सितंबर, 2024 को पुलिस वैन में गोली मार दी गई थी, जब उसे एक अन्य मामले में पूछताछ के लिए तलोजा जेल से कल्याण ले जाया जा रहा था।

न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति प्रसन्ना बी वराले की शीर्ष अदालत की पीठ ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से बॉम्बे हाईकोर्ट के 7 अप्रैल के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर यह आदेश पारित किया। हाईकोर्ट ने शिंदे की हिरासत में मौत के लिए पांच पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और मुंबई के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) लखमी गौतम की निगरानी में एक विशेष जांच दल गठित करने का आदेश दिया था।

उच्च न्यायालय के निर्देश में संशोधन करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि महाराष्ट्र के डीजीपी एसआईटी का गठन करेंगे जो जांच जारी रखेगी। महाराष्ट्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि राज्य को एसआईटी के गठन पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन इसे डीजीपी की निगरानी में गठित किया जाना चाहिए। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि अगर शिकायतकर्ता को कोई शिकायत है तो वह संबंधित ट्रायल कोर्ट में जा सकता है।
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सुप्रीम कोर्ट ने नालसा की जनहित याचिका पर केंद्र और 18 राज्यों से जवाब मांगा
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केंद्र और बिहार तथा उत्तर प्रदेश सहित 18 राज्यों से राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नालसा) की उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें गंभीर रूप से बीमार या 70 वर्ष से अधिक आयु के कैदियों को जमानत पर रिहा करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि जमानत से इनकार के खिलाफ शीर्ष अदालत में नहीं आए इन कैदियों को विशेष देखभाल की आवश्यकता है, लेकिन जेलों में भीड़भाड़ को देखते हुए जेल अधिकारियों के लिए यह संभव नहीं हो सकता है। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने नालसा की ओर से पेश वकील रश्मि नंदकुमार की दलीलों पर गौर किया और केंद्र और राज्यों को नोटिस जारी किए।

नालसा ने अपनी जनहित याचिका में कहा कि ये बुजुर्ग और असाध्य रूप से बीमार कैदी आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा राज्यों में कैद हैं। नालसा भारत में एक वैधानिक निकाय है, जिसकी स्थापना विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के तहत समाज के कमजोर वर्गों को मुफ्त और सक्षम कानूनी सेवाएं प्रदान करने के लिए की गई है। यह विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान के लिए लोक अदालतों का भी आयोजन करता है। 
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