राहुल के भाषण से जुड़ी पोस्ट पर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर को गिरफ्तारी से संरक्षण
सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के भाषण से जुड़ी पोस्ट मामले में सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर रौशन सिन्हा को गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजी मसीह की खंडपीठ ने पिछले बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान राहत बढ़ा दी।सुप्रीम कोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 136 के तहत एक विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर की गई थी। इसमें तेलंगाना हाईकोर्ट के 3 अप्रैल, 2025 के फैसले को चुनौती दी गई थी। तेलंगाना हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, उसे जांच अधिकारी के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी से कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की थी। गिरफ्तारी के डर से, सिन्हा ने उस आदेश का पालन नहीं किया।
राहुल के इस बयान से जुड़ा है मामला
यह मामला राहुल गांधी के पिछले साल 1 जुलाई को लोकसभा में दिए बयान से शुरू हुआ। राहुल ने कहा था, जो लोग खुद को हिंदू कहते हैं, वे 24 घंटे हिंसा, नफरत और झूठ में लिप्त रहते हैं। इस टिप्पणी की तीखी आलोचना हुई और मीडिया में व्यापक कवरेज हुआ। रौशन सिन्हा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की एक तस्वीर पोस्ट की और उसमें नीचे लिखा, जो हिंदू हैं वे हिंसक हैं: राहुल गांधी। इस पोस्ट के बाद कांग्रेस समर्थक वेंकट नाइक ने 2 जुलाई, 2024 को हैदराबाद के साइबर अपराध पुलिस स्टेशन में रौशन के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 352, 353(2), 353(1)(सी) और 336(4) के तहत एफआईआर दर्ज कराई।
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट से स्थानांतरित करने की याचिका खारिज की
सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से शीर्ष अदालत में स्थानांतरित करने की मांग वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालतों का इस्तेमाल वास्तविक कानूनी समाधान के बजाय अखबारों की सुर्खियां बनाने के लिए किया जा रहा है।
गौरतलब है कि ये स्थानांतरण याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय द्वारा दायर की गई थी। इसमें उन्होंने वक्फ अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिका को दिल्ली उच्च न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने की मांग की थी।