फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' की देशव्यापी रिलीज पर रोक लगाने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि फिल्म का शीर्षक और कथित प्रस्तुति जाति-आधारित रूढ़ियों को बढ़ावा दे सकती है और सामाजिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका है।
यह याचिका अधिवक्ता मकरध्वज यादव ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म के रिलीज़ से पहले ही देश के विभिन्न हिस्सों में यादव समुदाय के लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शन, जिला प्रशासन को ज्ञापन और सार्वजनिक आपत्तियां दर्ज कराई जा चुकी हैं, जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका वास्तविक और गंभीर प्रतीत होती है।
याचिका के अनुसार, यह मामला केवल निजी शिकायत तक सीमित नहीं है बल्कि व्यापक सामाजिक प्रभाव से जुड़ा है। इसमें कहा गया है कि फिल्म के शीर्षक और प्रचार सामग्री में यादव जी जैसे जाति-सूचक शब्द का प्रयोग पूरे समुदाय को फिल्म की कहानी और पात्रों से जोड़ देता है, जिससे आम दर्शक के मन में समुदाय को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि फिल्म की रिलीज से समुदाय की गरिमा, प्रतिष्ठा और सामूहिक आत्मसम्मान को अपूरणीय क्षति हो सकती है। इसमें संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा गया कि गरिमा और प्रतिष्ठा का अधिकार मौलिक अधिकार का हिस्सा है, और शीर्षक का प्रयोग पूरे समुदाय पर कथानक के प्रभाव का संकेत दे सकता है।
याचिकाकर्ता ने अदालत से अंतरिम रोक लगाने का अनुरोध करते हुए कहा है कि रिलीज की तय तारीख नजदीक होने के कारण कोई प्रभावी वैकल्पिक उपाय उपलब्ध नहीं है। उनका कहना है कि यदि फिल्म पहले रिलीज हो जाती है और बाद में आपत्तिजनक पाई जाती है, तो सामाजिक नुकसान की भरपाई संभव नहीं होगी, जबकि अस्थायी रोक से निर्माताओं को कोई अपूरणीय क्षति नहीं होगी और वे अदालत के निर्देशानुसार संशोधन कर सकते हैं।