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SC: ईवीएम सत्यापन के लिए नीति बनाने की मांग वाली याचिका पर दूसरी बेंच करेगी सुनवाई, सीजेआई खन्ना का निर्देश

Fri, 20 Dec 2024 01:29 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Supreme Court - फोटो : ANI
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के सत्यापन के लिए नीति बनाने की मांग वाली याचिका पर अगले साल जनवरी में जस्टिस दीपांकर दत्ता की अध्यक्षता वाली बेंच सुनवाई करेगी। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि इस मुद्दे पर हरियाणा के पूर्व मंत्री और पांच बार के विधायक करण सिंह दलाल और लखन कुमार सिंगला की नई याचिका पर जस्टिस दत्ता की अध्यक्षता वाली पीठ 20 जनवरी, 2025 से सुनवाई करेगी।
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चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने याचिका को खारिज करने की मांग करते हुए कहा कि इसी तरह की याचिकाएं पहले भी खारिज की जा चुकी हैं। इससे पहले 13 दिसंबर को जस्टिस विक्रम नाथ और पी बी वराले की पीठ ने याचिका पर सुनवाई करने से इनकार करते हुए कहा था कि इसे उसी पीठ को सुनने दिया जाए जिसने इसी तरह की याचिकाओं पर सुनवाई की है। अब इसे सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया है। 26 अप्रैल को अपने फैसले में सर्वोच्च न्यायालय ने ईवीएम में हेराफेरी के संदेह को 'निराधार' करार दिया था। 

हालांकि, शीर्ष अदालत ने चुनाव परिणामों में दूसरे और तीसरे स्थान पर आने वाले असफल उम्मीदवारों के लिए एक रास्ता खोल दिया और उन्हें चुनाव पैनल को शुल्क का भुगतान करके लिखित अनुरोध पर प्रति विधानसभा क्षेत्र में पांच प्रतिशत ईवीएम में लगे माइक्रोकंट्रोलर चिप्स के सत्यापन की मांग करने की अनुमति दी थी। दलाल और सिंगला की नई याचिका में 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स बनाम यूनियन ऑफ इंडिया' के मामले में शीर्ष अदालत के 26 अप्रैल के फैसले का अनुपालन करने की मांग की गई है। दलाल और सिंगला ने अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे सबसे अधिक वोट प्राप्त किए और चुनाव आयोग (ईसी) को ईवीएम के चार घटकों - कंट्रोल यूनिट, बैलट यूनिट, वीवीपीएटी और सिंबल लोडिंग यूनिट की मूल "बर्न मेमोरी" या माइक्रोकंट्रोलर की जांच के लिए एक प्रोटोकॉल लागू करने का निर्देश देने की मांग की।
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हाथी गलियारे पर 2020 का सुप्रीम कोर्ट का निर्णय ही अंतिम फैसला है : सीजेआई
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि नीलगिरी में हाथी गलियारे में पड़ने वाली निजी संपत्तियों और रिसॉर्ट के मालिकों को जमीन खाली करने का आदेश देने वाला उसका 2020 का फैसला ही अंतिम फैसला है। हालांकि, सीजेआई संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट को यह जांच करने की अनुमति दी कि क्या शीर्ष अदालत की ओर से नियुक्त जांच समिति ने भूमि सीमांकन और अधिग्रहण से संबंधित आपत्तियों को दूर करने में अपने दायरे से बाहर जाकर काम किया है।

तमिलनाडु सरकार के आदेश के तहत हाथी गलियारे के लिए भूमि चिह्नित करने के नीलगिरी जिला कलेक्टर के फैसले के खिलाफ निजी भूमि मालिकों की आपत्तियों पर फैसला करने के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया था। मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति के. वेंकटरमण, वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर-इंडिया के सलाहकार अजय देसाई और वाइल्डलाइफ फर्स्ट के ट्रस्टी तथा राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड के पूर्व सदस्य प्रवीण भार्गव जांच समिति का हिस्सा थे। शीर्ष अदालत ने 14 अक्तूबर 2020 को मद्रास हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशन ऑफ मुदुमलाई और अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती की याचिकाओं सहित 35 याचिकाओं पर अपना फैसला सुनाया था। अदालत ने मद्रास हाईकोर्ट के 2011 के फैसले को बरकरार रखा था, जिसमें अभिनेता चक्रवर्ती और निजी भूमि मालिकों सहित रिसॉर्ट मालिकों से हाथी गलियारे में जमीन खाली करने और अधिकारियों को इसका कब्जा सौंपने के लिए कहा गया था। बता दें कि संजीव खन्ना 2020 का फैसला सुनाने वाली पीठ का भी हिस्सा थे।

शुक्रवार को फैसले के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने वाले आवेदनों का निपटारा करते हुए, सीजेआई खन्ना, कहा, हम स्पष्ट करते हैं कि 14 अक्तूबर, 2020 के फैसले में दर्ज निर्णय अंतिम रूप ले चुका है। पीठ ने तमिलनाडु सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अमित आनंद तिवारी की दलीलों पर ध्यान दिया और कहा कि मामले के निपटारे के लिए हाईकोर्ट में समय सीमा तय की जानी चाहिए अन्यथा यह सालों तक लटकता रहेगा। सीजेआई ने कहा, पक्षकारों के लिए हाईकोर्ट में मामले के शीघ्र निपटारे की मांग करने का रास्ता खुला रहेगा।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से पूछा- आरे में कितने और पेड़ काटने का प्रस्ताव है
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को महाराष्ट्र सरकार से पूछा है कि क्या उसकी मुंबई के आरे जंग में और पेड़ काटने का कोई योजना है। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि सभी पक्षों को फरवरी के दूसरे हफ्ते तक अपनी दलीलें पूरी करनी होंगी, ताकि महाराष्ट्र सरकार के वकील इस मुद्दे पर अपना बयान दे सकें। 

जब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में सभी पक्षों का सार्वजनिक हित है, तो पीठ ने कहा, केवल सार्वजनिक हित नहीं, बल्कि पर्यावरण का भी हित है। हजारों पेड़ पहले ही काटे जा चुके होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 10 जनवरी 2025 को तय की है। 
  

पटियाला निकाय चुनाव: विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के मामले में पंजाब चुनाव आयोग को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को पंजाब चुनाव आयोग को उन याचिकाओं पर नोटिस जारी किया, जिनमें सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) पर पटियाला नगर निगम चुनावों में विपक्षी उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने का आरोप लगाया गया है। भाजपा, कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल के उम्मीदवारों की ओर से दाखिल याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया है।

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने हालांकि आगामी चुनावों पर रोक लगाने से इन्कार करते हुए कहा कि वह आरोपों की गहन जांच के बाद ही हस्तक्षेप करेगी। पटियाला नगर निगम के लिए चुनाव 21 दिसंबर को होने हैं, जबकि विपक्षी उम्मीदवारों की अनुपस्थिति के कारण सत्तारूढ़ आप के 15 पार्षद पहले ही निर्विरोध निर्वाचित हो चुके हैं। 60 सदस्यीय सदन में 31 पार्षदों का बहुमत हासिल करने के लिए आप को 16 और पार्षदों की आवश्यकता है। पीठ ने शुक्रवार को कुछ कांग्रेस उम्मीदवारों की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा और भाजपा उम्मीदवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील एथेनम वेलन की दलीलों पर गौर किया। दलीलों में कहा गया था कि विपक्षी दलों के कई उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने का अवसर नहीं दिया गया। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को सभी पक्षों को अपने जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और सुनवाई 19 फरवरी, 2025 के लिए स्थगित कर दी।

सिख विरोधी दंगे: सुप्रीम कोर्ट का केंद्र को जवाब दाखिल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्र सरकार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के मामलों में मुकदमा चलाने की स्थिति पर दो हफ्ते के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया। जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की पीठ ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से हलफनामा दाखिल करने को कहा और याचिकाकर्ताओं को विस्तार से आपत्तियां दाखिल करने की अनुमति दी। सुनवाई के दौरान भाटी ने कहा कि विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा की गई सिफारिशों को लागू किया गया है। 

एक याचिकाकर्ता के वकील ने एसआईटी की रिपोर्ट में कुछ स्पष्ट खामियों का जिक्र करते हुए कहा कि 500 मामलों में एक प्राथमिकी में जोड़ा गया था और जांच अधिकारी उनकी सही तरीके से जांच नहीं कर सके। 
  

सुप्रीम कोर्ट का राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आर्द्रभूमि का निरीक्षण करने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे स्पेस एप्लिकेशन सेंटर एटलस द्वारा पहचाने की गई आर्द्रभूमि का निरीक्षण तीन महीने के भीतर पूरा करें। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस अहसानुद्दीन की पीठ ने कहा कि इसरो के मुताबिक 2017 से पहले भारत में 2.25 हेक्टेयर से अधिक आर्द्रभूमि थी। इसरो के आंकड़ों के मुताबिक, यह भूमि अब बढ़ गई है। कोर्ट ने कहा कि आंकड़ों की जमीन पर जांच की जानी चाहिए। 

अनुसूचित जातियों के उप-वर्गीकरण का विचार नहींः केंद्र
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण करने के लिए किसी तरह कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है। सरकार के स्तर पर इस पर कोई विचार नहीं हो रहा है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को लोकसभा में अनुसूचित जाति (एससी) और अनुसूचित जनजाति (एसटी) उप-वर्गीकरण को लेकर लिखित जवाब दिया। कानून मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हाल के फैसले पर कोई कदम उठाने पर विचार नहीं किया जा रहा है, जिसमें कहा गया है कि अनुसूचित जातियों का उप-वर्गीकरण किया जा सकता है। लोकसभा में सरकार से पूछा गया था कि क्या सरकार की ओर से उप-वर्गीकण की दिशा में कोई कदम उठाया गया है या उठाने पर विचार किया जा रहा है?

मूर्ति चोरी मामलों में 41 एफआईआर फाइलों का गायब होना चौंकाने वाला: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने तमिलनाडु सरकार के गृह विभाग के सचिव को हलफनामा दाखिल करने और सरकार का रुख स्पष्ट करने के लिए 31 जनवरी, 2025 तक समय दिया है। पीठ ने सुनवाई के दौरान उन्हें ऑनलाइन उपस्थित रहने का भी निर्देश दिया है। अदालत ने पाया कि 41 फाइलों में से 27 का पता लगा लिया गया है और 11 मामलों में नई एफआईआर दर्ज की गई हैं।

पीठ ने कहा, जिस क्षण आप नई एफआईआर दर्ज करते हैं, यह आरोपी के बचाव का एक तरीका बन जाता है। नई एफआईआर कैसे दर्ज की जा सकती है। याचिकाकर्ता एलीफेंट जी राजेंद्रन की ओर से पेश हुए वकील जी एस मणि ने कहा कि चोरी कई साल पहले हुई थी। इसमें शामिल मूर्तियों की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 300 करोड़ रुपये से अधिक है। इन मामलों में कोई प्रगति नहीं हुई है। यह सरासर लापरवाही है। शीर्ष अदालत ने फरवरी, 2023 में राज्य के गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक, हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती आयुक्त और मूर्ति चोरी विंग का नेतृत्व करने वाले अतिरिक्त डीजीपी को नोटिस जारी किया था। राजेंद्रन ने फाइलों के गायब होने की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग की है और आरोप लगाया है कि यह वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, नौकरशाही और मूर्ति माफिया के बीच एक गंभीर साजिश का नतीजा है।
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जब देश में डॉक्टरों की कमी हो तो मेडिकल सीटें बर्बाद नहीं होनी चाहिए: सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल सीटों को लेकर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जब देश डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रहा है तो कीमती मेडिकल सीटें बर्बाद नहीं होनी चाहिए। साथ ही अदालत ने अधिकारियों को रिक्त सीटों को भरने के लिए नये सिरे से काउंसलिंग आयोजित करने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति बी आर गवई और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने प्रवेश अधिकारियों को विशेष काउंसलिंग आयोजित करने और मेडिकल पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश प्रक्रिया 30 दिसंबर तक पूरी करने को कहा।  
शीर्ष अदालत ने पांच दौर की काउंसलिंग के बाद भी शेष खाली सीटों के लिए प्रवेश अधिकारियों को एक अलग/विशेष काउंसलिंग दौर आयोजित करने का निर्देश देने की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।
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