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Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट में QR कोड वाले निर्देश पर कल सुनवाई; आपसी समझौते के बाद दो एफआईआर हुईं रद्द

Mon, 14 Jul 2025 02:13 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई (फाइल)
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सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को एक याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें कांवड़ यात्रा मार्ग पर सभी भोजनालयों और दुकानों पर मालिक की जानकारी वाला QR कोड लगाने के निर्देश को चुनौती दी गई है। यह याचिका शिक्षाविद अपूर्वानंद झा और अन्य ने दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि इस तरह का आदेश निजता के अधिकार का उल्लंघन है और इससे धार्मिक आधार पर भेदभाव और कलंक का खतरा पैदा होता है। याचिका में यह भी आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल सुप्रीम कोर्ट की तरफ से लगाए गए रोक के बावजूद नए तरीके से वही निर्देश फिर से लागू कर दिया है।
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याचिकाकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय की 25 जून की प्रेस विज्ञप्ति का हवाला दिया है, जिसमें दुकान मालिकों के नाम स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने को कहा गया है। सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि केवल भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता जरूरी है, न कि मालिक की पहचान। अब यह मामला न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और न्यायमूर्ति एन कोटेश्वर सिंह की पीठ के समक्ष 15 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।

सिमी पर प्रतिबंध के खिलाफ दायर याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें सिमी के प्रतिबंध को और पांच साल बढ़ाने के आदेश को चुनौती दी गई थी। दरअसल न्यायाधिकरण ने अपने एक फैसले में स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) पर और पांच साल तक और प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने, न्यायाधिकरण के 24 जुलाई 2024 को दिए गए आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। 
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केंद्र सरकार ने 29 जनवरी 2024 को सिमी पर और पांच साल प्रतिबंध जारी रखने का फैसला किया। इसके बाद गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम, 1967 के तहत न्यायाधिकरण का गठन किया गया। सिमी को पहली बार साल 2001 में प्रतिबंधित घोषित किया गया। उस वक्त केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी। उसके बाद से इस संगठन पर प्रतिबंध जारी है। सिमी की स्थापना 25 अप्रैल 1977 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में हुई थी। जमीयत ए इस्लामी हिंद में विश्वास रखने वाले युवाओं और छात्रों ने सिमी का गठन किया था। 

चुनाव चिन्ह विवाद पर अगस्त में होगी सुनवाई

चुनाव चिन्ह विवाद पर शिवसेना यूबीटी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट अगस्त में सुनवाई करेगा। शिवसेना यूबीटी ने महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की है। स्पीकर ने धनुष बाण चुनाव चिन्ह को एकनाथ शिंदे गुट को देने का आदेश दिया था। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह मामला लंबे समय से लंबित है और अब इस पर असमंजस की स्थिति को जारी रखने की इजाजत नहीं दी जा सकती। 

पीठ ने शिवसेना यूबीटी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा कि हम मामले की सुनवाई अगस्त में तय कर रहे हैं। सिब्बल ने कहा कि राज्य में निकाय चुनाव होने हैं, ऐसे में वे चाहते हैं कि मामले पर जल्द सुनवाई हो। हालांकि एकनाथ शिंदे गुट की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील नीरज किशन कौल ने जल्द सुनवाई का विरोध किया और कहा कि अदालत पहले ही कह चुकी है कि वे जल्द सुनवाई नहीं कर सकते। 
 

सुप्रीम कोर्ट ने आपसी समझौते के बाद दो एफआईआर रद्द कीं
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को दो एफआईआर को रद्द कर दिया, जिनमें से एक में दुष्कर्म के गंभीर आरोप थे। अदालत ने दोनों पक्षों के बीच हुए आपसी समझौते को ध्यान में रखते हुए यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और संजय कुमार की पीठ ने कहा कि जब पक्षों ने आपसी मतभेद सुलझा लिए हैं, तो मुकदमे की कार्यवाही जारी रखना व्यर्थ होगा और इससे केवल मानसिक तनाव बढ़ेगा।

मामला महाराष्ट्र के जलगांव जिले का है। नवंबर 2023 में पहला मामला मारपीट और हिंसा को लेकर दर्ज हुआ था, जबकि अगले ही दिन दूसरे पक्ष ने बलात्कार और धमकी के आरोपों के साथ एफआईआर दर्ज कराई थी। मार्च 2024 में दूसरी एफआईआर की शिकायतकर्ता ने अदालत में हलफनामा दाखिल कर कहा कि वह अब इस केस को आगे नहीं बढ़ाना चाहती। वह शादीशुदा है, अपनी निजी जिंदगी में स्थिरता चाहती है और मुकदमा केवल तनाव का कारण बनेगा। अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को विवाह से संबंधित खर्चों के लिए पांच लाख रुपये दिए गए हैं और यह मामला अब शांतिपूर्ण तरीके से सुलझ चुका है। इसलिए दोनों एफआईआर रद्द की जाती हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में 1158 शिक्षकों पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्तियां रद्द की
सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में 1,158 सहायक प्रोफेसरों और पुस्तकालयाध्यक्षों की नियुक्तियां रद्द कर दी। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि इनके चयन की प्रक्रिया में पूरी तरह से मनमानी की गई है। जस्टिस सुधांशु धूलिया और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट की खंडपीठ के सितंबर 2024 के फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें नियुक्तियों को बरकरार रखा गया था।

नियुक्ति प्रक्रिया अक्तूबर 2021 में शुरू हुई, जब पंजाब उच्च शिक्षा निदेशक ने राज्य विधानसभा चुनावों से पहले विभिन्न विषयों के लिए सहायक प्रोफेसर और पुस्तकालयाध्यक्षों के पदों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करते हुए एक सार्वजनिक नोटिस जारी किया। बाद में जब कई अभ्यर्थियों ने योग्यता आधारित चयन प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए याचिकाएं दायर कीं, तो यह भर्ती कानूनी जांच के दायरे में आ गई।

झारखंड हाईकोर्ट में फैसला न सुनाने का मामला- छह को फांसी, चार को उम्रकैद
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को झारखंड के 10 दोषियों की याचिका पर सुनवाई की सहमति दी, जिनमें से छह को फांसी और चार को उम्रकैद की सजा मिली है। दोषियों ने आरोप लगाया कि झारखंड हाईकोर्ट ने उनके अपीलों पर दो-तीन साल पहले सुनवाई पूरी करने के बावजूद अभी तक फैसला नहीं सुनाया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की पीठ ने झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से वकील फौज़िया शकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने 2022 और 2023 में बहस पूरी होने के बाद फैसले सुरक्षित रख लिए, लेकिन अब तक कोई आदेश नहीं दिया गया।

दोषी या तो रांची की बिरसा मुंडा जेल में बंद हैं या फिर दुमका की जेल में। याचिका में कहा गया कि ये लोग 6 से 16 साल तक की सजा भुगत चुके हैं और न्याय में देरी उनके मौलिक अधिकारों का हनन है। सुप्रीम कोर्ट ने इसे एक गंभीर और परेशान करने वाला मुद्दा बताते हुए हाईकोर्ट के सभी लंबित फैसलों पर रिपोर्ट मांगी है।

2003 टेक्नोलॉजी इंजीनियर मर्डर केस: चार दोषियों की उम्रकैद बरकरार, दया याचिका की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2003 में एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की हत्या के मामले में चार दोषियों की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा, लेकिन उन्हें राज्यपाल के समक्ष दया याचिका दाखिल करने की अनुमति दी। जस्टिस एम एम सुंदरेश और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ ने कहा कि अपराध के समय आरोपी युवा थे और अब वे अधेड़ उम्र में पहुंच चुके हैं। कोर्ट ने कहा, 'इनकी जेल में आचरण ठीक रहा है और ये जन्मजात अपराधी नहीं थे, बल्कि यह एक खतरनाक गलती थी जिसने एक मासूम की जान ले ली।'

पीड़ित बी वी गिरीश की 3 दिसंबर 2003 को हत्या कर दी गई थी, जिनकी सगाई दो दिन पहले शुभा नामक युवती से हुई थी। पुलिस के अनुसार, शुभा और उसके तीन दोस्तों – अरुण वर्मा, वेंकटेश और दिनेश – ने मिलकर गिरीश की हत्या की साजिश रची थी। कोर्ट ने कहा कि युवती की मानसिक स्थिति और पारिवारिक दबाव ने इस त्रासदी को जन्म दिया। कोर्ट ने राज्यपाल से आग्रह किया कि दया याचिका पर सहानुभूति पूर्वक विचार किया जाए।
 

नीट-पीजी परीक्षा में पारदर्शिता की मांग वाली याचिका पर 3 अगस्त को सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातकोत्तर (नीट-पीजी) की परीक्षा में पारदर्शिता की मांग वाली याचिकाओं पर अगले महीने 3 अगस्त को सुनवाई करेगा। याचिकाओं में खासतौर पर उत्तर कुंजी और मूल्यांकन प्रक्रिया के सार्वजनिक न होने पर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने इन याचिकाओं पर सोमवार को संक्षिप्त सुनवाई की।

 वकील तन्वी दुबे के माध्यम से दायर याचिकाओं में से एक में मूल्यांकन प्रणाली की अपारदर्शी प्रकृति को चुनौती दी गई है। याचिका में नीट-पीजी आयोजित करने के लिए जिम्मेदार प्राधिकरण राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड (एनबीई) को कई निर्देश देने की मांग की गई है। याचिका में अभ्यर्थियों को प्रश्न पत्र और उत्तर कुंजी जारी करने व मूल्यांकन के अनुसार सही और गलत प्रश्नों का खुलासा करने की मांग की गई है।  

सजा के खिलाफ अपील पर फैसला नहीं सुनाए जाने पर 10 दोषी सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
सजा के खिलाफ अपील पर फैसला नहीं सुनाए पर 10 दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। शीर्ष अदालत इनकी याचिका पर विचार करने के लिए सहमत हो गई है। इनमें से छह को मौत और चार को उम्रकैद की सजा मिली है और झारखंड हाईकोर्ट ने दो-तीन साल पहले इनकी अपील पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है।

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने याचिका पर झारखंड सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। दोषियों की ओर से पेश वकील फौजिया शकील ने कहा कि हाईकोर्ट ने 2022 और 2023 में दलीलें सुनने के बाद ट्रायल कोर्ट की ओर से दोषियों को दी गई सजा और उनकी दोषसिद्धि के खिलाफ उनकी अपील पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

फौजिया शकील ने इसे सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसलों के अनुरूप सजा को निलंबित करने के लिए एक उपयुक्त मामला बताया। पीठ ने पाया कि सभी 10 मामलों में अपीलों की सुनवाई करने वाले उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एक ही थे। दोषियों ने तर्क दिया कि उन्हें निचली अदालतों द्वारा जघन्य अपराधों के लिए सजा सुनाई गई थी और वे छह से 16 वर्ष से अधिक कारावास की सजा काट चुके हैं।

उदयपुर फाइल्स : रिलीज पर रोक के आदेश के खिलाफ याचिका सुनेगा सुप्रीम कोर्ट
 सुप्रीम कोर्ट उदयपुर फाइल्स: कन्हैया लाल टेलर मर्डर फिल्म पर रोक लगाने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा। फिल्म 11 जुलाई को रिलीज होने वाली थी। निर्माताओं की ओर से पेश वकील ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए कहा कि सेंसर बोर्ड के प्रमाणन के बावजूद फिल्म रोक दी गई है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि वह बुधवार या उसके बाद किसी भी दिन इस पर सुनवाई करेगी। वकील ने कहा कि शीर्ष कोर्ट ने फिल्म रिलीज पर रोक की मांग वाली याचिका पर तत्काल सुनवाई से मना कर दिया था, पर हाईकोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए 10 जुलाई को इस पर रोक लगा दी। 
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आईआईटी दिल्ली-खड़गपुर और कोटा के छात्र आत्महत्या मामलों में मांगी जांच रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी खड़गपुर और राजस्थान के कोटा में छात्र आत्महत्याओं को गंभीरता से लिया है। तीनों राज्यों की पुलिस से मामले की जांच रिपोर्ट मांगी है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिसआर महादेवन की पीठ ने गृह मंत्रालय को मामले में पक्षकार बनाते हुए उच्च शिक्षण संस्थानों में आत्महत्याओं पर चिंता जताई। न्यायमित्र वरिष्ठ अधिवक्ता अपर्णा भट्ट ने इस मुद्दे पर मंत्रालय से सहायता मांगी थी।

पीठ ने दिल्ली पुलिस से आईआईटी दिल्ली में पढ़ाई के दौरान 2023 में आत्महत्या करने वाले दो छात्रों के परिजनों की शिकायतों पर दर्ज एफआईआर की जांच की स्थिति बताने के लिए कहा। पीठ ने दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से कहा, हम देखना चाहते हैं कि जांच में क्या प्रगति हुई है। हम जानना चाहते हैं कि एफआईआर दर्ज होने के बाद आपने क्या किया है। आपको हमें बताना होगा कि क्या किया गया है। पीठ ने पश्चिम बंगाल पुलिस से आईआईटी खड़गपुर के छात्र द्वारा 4 मई को की गई आत्महत्या की जांच के बारे में भी जानकारी देने के लिए कहा। इसी तरह राजस्थान पुलिस से कोटा में अपने कमरे में लटकी हुई पाई गई नीट अभ्यर्थी की मौत की जांच की स्थिति बताने के लिए कहा, जहां वह अपने माता-पिता के साथ रहती थी। पीठ ने सुनवाई 21 जुलाई के लिए स्थगित कर दी। 

एनटीएफ का गठन, आत्महत्या के प्रमुख कारणों की पहचान करेगा
शीर्ष अदालत ने 24 मार्च के अपने एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों की आत्महत्या के लगातार मामलों पर ध्यान दिया गया था। छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को दूर करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्यबल (एनटीएफ) का गठन किया गया था।
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