हादसे में लकवाग्रस्त हुए व्यक्ति को 25 लाख रुपये मुआवजे का सुप्रीम आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 19 साल पहले बंगलूरू में ऑटो-रिक्शा पर पेड़ की शाखा गिरने के हादसे में लकवाग्रस्त हुए व्यक्ति को बड़ी राहत देते हुए 25 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में, मोटर वाहन अधिनियम (एमवीए) की धारा 166 के तहत मुआवजे का दावा, खासकर नगर निकाय के खिलाफ दायर नहीं किया जा सकता। यह प्रावधान सड़क दुर्घटना के पीड़ितों या उनके कानूनी प्रतिनिधियों को दोषी चालक या मालिक की गलती या लापरवाही साबित करके मुआवजे का दावा करने की अनुमति देता है।
जस्टिस संजय करोल व जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 2007 से लकवाग्रस्त व्यक्ति के लिए मुआवजे की रकम 17.10 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये (साथ में ब्याज) कर दी। पीठ ने कहा, जिस व्यक्ति को ऐसी गंभीर चोटें आई हों जिनसे उसका जीवन ही बदल गया हो, उसे बेसहारा छोड़ देना न्याय की भावना के अनुरूप नहीं है। पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट से पहले दिया गया मुआवजा अपर्याप्त था। यह मामला 23 जून, 2007 का है, जब केके उमेश कुमार बंगलूरू में ऑटोरिक्शा में जा रहे थे। भारी बारिश के कारण, गाड़ी चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास एक पुराने पेड़ के नीचे रुक गई। एक बड़ी टहनी टूटकर गाड़ी को कुचल गई, जिससे कुमार की रीढ़ की हड्डी में ऐसी चोटें आईं जिससे उनकी जिंदगी बदल गई। उन्हें पूरी तरह लकवा मार गया।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा ने 200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अभिनेत्री जैकलीन फर्नांडिस की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। अब इस मामले की सुनवाई 25 जून को किसी अन्य पीठ के सामने होगी। जस्टिस मिश्रा और जस्टिस एएस चंदुरकर की पीठ के समक्ष सुनवाई शुरू होते ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि वह प्रवर्तन निदेशालय की ओर से पेश हो रहे हैं। इसके बाद जस्टिस मिश्रा ने कहा कि एक संबंधित मामले में उनके बेटे सरकार की ओर से पेश हुए थे, इसलिए वह इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।
जैकलीन ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट के 30 मई के आदेश को चुनौती दी है। ट्रायल कोर्ट ने ईडी की जांच के आधार पर उनके और ठग सुकेश के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था। अदालत ने माना था कि पहली नजर में जैकलीन ने सुकेश से महंगे उपहार लिए, जबकि उन्हें उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी थी।
अदालत ने यह भी कहा था कि वह कथित अपराध से अर्जित धन को छिपाने में उसकी मदद कर रही थीं। 3 जून को जैकलीन, सुकेश और अन्य आरोपियों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए, जिसके बाद मामले की सुनवाई शुरू हुई है। सुकेश और उसकी पत्नी को सितंबर 2021 में गिरफ्तार किया गया था और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में है।