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Supreme Court: 2020 के दिल्ली दंगे पर सुप्रीम सुनवाई जारी; छत्तीसगढ़ के पूर्व CM के बेटे की याचिका पर भी विचार

Tue, 09 Dec 2025 03:18 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : एएनआई
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सुप्रीम कोर्ट 2020 के दिल्ली दंगों के मामलों में मुकदमे का सामना कर रहे कई लोगों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। शीर्ष कोर्ट दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से 70 वकीलों को महाधिवक्ता बनाने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर भी सुनवाई करेगा।
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इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट फ्लिपकार्ट इंडिया की उस याचिका पर सुनवाई करेगा, जिसमें कंपनी ने प्रतिस्पर्धा आयोग के उसके खिलाफ दिए गए आदेश को चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट देश की नदियों में प्रदूषण से जुड़े स्वत: संज्ञान मामले पर भी सुनवाई करेगा।

शीर्ष कोर्ट कई याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। इनमें जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका भी शामिल है, जिसमें खासकर एक समुदाय के घरों में तोड़फोड़ को चुनौती दी गई।  सुप्रीम कोर्ट छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल के धनशोधन मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करेगा।
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नफरती भाषण (हेट स्पीच) से जुड़ी याचिकाओं पर भी सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। सुप्रीम कोर्ट कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मामले पर भी सुनवाई करेगा।

 किसी मामले को बेवजह हाईकोर्ट में विचार के लिए भेजने से बचना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट 
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी मामले को अनावश्यक रूप से हाईकोर्ट में नए सिरे से विचार के लिए भेजने से बचना चाहिए। इससे मुकदमेबाजी का नया दौर शुरू हो जाता है।जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस मनमोहन की पीठ ने कहा कि यह विचार मुकदमेबाजी को कम करने का है, न कि उसे बढ़ाने का। पीठ इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक आदेश के खिलाफ दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें एक मामले को सभी संबंधित पक्षों को सुनने के बाद नए सिरे से विचार के लिए वापस भेज दिया गया था। यह मामला प्राधिकारियों की ओर से राजस्व मानचित्र में सुधार के लिए एक व्यक्ति के आवेदन को खारिज करने से संबंधित था। पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया।

अपील पर विचार करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि अदालत ने उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 30 की गलत व्याख्या की है, जो मानचित्र और फील्ड बुक के रखरखाव से संबंधित है। पीठ ने कहा कि इससे अनावश्यक रूप से आगे मुकदमेबाजी बढ़ सकती थी। पीठ ने आगे कहा, हम यह भी जोड़ना चाहेंगे कि इस न्यायालय का पूर्व मत यह था कि यदि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन होता है, तो मामले को संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर प्रदान करने के लिए वापस किया जाना चाहिए। हालांकि, समय बीतने के साथ, यह मत बदल गया।
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शरजील इमाम ने सुप्रीम कोर्ट से जमानत का अनुरोध किया
कार्यकर्ता शरजील इमाम ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से फरवरी 2020 के दिल्ली दंगों के एक मामले में जमानत देने का अनुरोध करते हुए कहा कि वह न तो हिंसा में शामिल था और न ही उसकी इसमें कोई भूमिका थी और वह लगभग छह साल से विचाराधीन कैदी के रूप में जेल में है। शरजील के वकील ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन वी अंजारिया की पीठ को बताया कि अभियोजन पक्ष ने उसके खिलाफ शीर्ष अदालत के समक्ष केवल एक ही बात रखी है और वह है उसके द्वारा दिए गए कथित "भड़काऊ भाषण"।

शरजील की ओर से पेश हुए सीनियर एडवोकेट सिद्धार्थ दवे ने कहा कि भाषणों में इस्तेमाल किए गए कुछ शब्द अप्रिय थे।  क्या कोई भाषण अपने आप में साज़िश वाला हो सकता है? क्या ऐसा है? और यह कोई एकतरफा भाषण नहीं है। मैंने आपके सामने दिखाया है, वह अहिंसा का आह्वान करते हैं। वह कहते हैं कि मार खाओ, हमला मत करो। वह यही कह रहे हैं।दवे के अलावासीनियर एडवोकेट सलमान खुर्शीद, सिद्धार्थ लूथरा और अन्य ने भी इस मामले में कुछ अन्य आरोपियों की ओर से अपनी दलीलें पेश कीं।
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