फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

SC: सुप्रीम कोर्ट के जज अमानुल्लाह ने बिहार के निलंबित न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग किया

Fri, 10 Feb 2023 03:23 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, नई दिल्ली

सार

बीबीसी, जस्टिस अमानुल्लाह से लेकर सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी आज की सभी खबरों के लिए जुड़े रहें अमर उजाला के साथ...
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : Social Media
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने शुक्रवार को बिहार के एक न्यायिक अधिकारी की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसने एक नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के मामले में पटना हाईकोर्ट द्वारा अपने निलंबन को चुनौती दी थी।

विज्ञापन


सुनवाई की शुरुआत में, जस्टिस कृष्ण मुरारी और अमानुल्लाह की पीठ ने बिहार में अररिया के निलंबित अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायाधीश (एडी एंड एसजे) शशिकांत राय की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह को बताया कि अमानुल्लाह उस समय फैसला देने वाले जजों में भी शामिल थे। इसलिए अमानुल्लाह खुद को इस सुनवाई से अलग रखना चाहते हैं।

 एक संक्षिप्त सुनवाई के दौरान, विकास सिंह ने कहा कि राय के एक कनिष्ठ न्यायिक अधिकारी को अब पटना उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश द्वारा अररिया का जिला न्यायाधीश (डीजे) बनाया गया है, क्योंकि मौजूदा जिला न्यायाधीश इस साल 31 जनवरी को सेवानिवृत्त हो गए थे जो कि एक उचित निर्णय नहीं था।  
विज्ञापन


मद्रास HC के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने वालीं लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी पर सुप्रीम कोर्ट में बहस
उच्चतम न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में शपथ लेने से लक्ष्मण चंद्रा विक्टोरिया गौरी को रोकने संबंधी याचिकाओं पर सात फरवरी को विचार करने से इनकार की वजह शुक्रवार को बताई। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि हमने संविधान पीठ के फैसले का पालन किया है और हम उपयुक्तता के सवाल पर नहीं जा सकते।  हालांकि, विस्तृत आदेश अभी शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना बाकी है।

उच्चतम न्यायालय में दो याचिकाएं दायर करके अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में गौरी की नियुक्ति का विरोध किया गया था। इनमें से एक याचिका मद्रास उच्च न्यायालय के तीन वकीलों की ओर से दायर की गयी थी। शीर्ष अदालत ने सात फरवरी को गौरी की नियुक्ति के खिलाफ याचिकाएं खारिज कर दी थी, उसके चंद मिनट बाद ही उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी राजा द्वारा एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में पद की शपथ दिलाई गई थी।

शीर्ष अदालत ने कहा था कि गौरी को एक अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया है और यदि वह शपथ के प्रति सच्ची नहीं हैं या शपथ के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं करती हैं, तो कॉलेजियम को इस पर विचार करने का अधिकार है। न्यायालय ने कहा था कि ऐसे कई उदाहरण हैं, जिसमें लोगों को स्थायी न्यायाधीश नहीं बनाया गया है। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति बी आर गवई की एक विशेष पीठ ने बुधवार को कहा था, 'हम रिट याचिका पर विचार नहीं कर रहे हैं। इसका (विस्तृत) कारण बाद में दिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट ने बीबीसी पर बैन की मांग वाली याचिका की खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू सेना अध्यक्ष की याचिका खारिज कर दी है। बता दें कि हिंदू सेना के अध्यक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर प्रधानमंत्री की गुजरात दंगों में कथित भूमिका पर आधारित डॉक्यूमेंट्री प्रसारित करने के लिए बीबीसी और बीबीसी इंडिया पर प्रतिबंध लगाने की मांग की थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि बीबीसी और बीबीसी इंडिया भारत में शांति और अखंडता को बाधित करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी)  ने 2002 के गुजरात दंगों में प्रधानमंत्री मोदी पर एक डॉक्यूमेंट्री प्रसारित की थी। जिसे केंद्र सरकार ने भ्रामक मानते हुए इस पर बैन लगा दिया था। इस प्रतिबंध के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। इस पर हिंदू सेना के अध्यक्ष विष्णु गुप्ता और बीरेंद्र कुमार सिंह ने भारत में बीबीसी के संचालन पर ही बैन लगाने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। 

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें