न्यायमूर्ति नजीर बुधवार को रिटायर हो गए। वे अपने अंतिम कार्य दिवस पर सीजेआई के साथ औपचारिक बेंच के हिस्से के रूप में बैठे थे। आइए पढ़ते हैं सुप्रीम कोर्ट से जुड़ी अहम खबरें...
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत पर लगे भ्रष्टाचार के आरोप की सीबीआई जांच करने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट ने 27 अक्तूबर 2020 को दो पत्रकार उमेश शर्मा और शिव प्रसाद सेमवाल के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए भाजपा नेता के खिलाफ लगाए गए आरोपों की सीबीआई जांच का आदेश दिया था।
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शीर्ष अदालत ने नोट किया कि दोनों पत्रकारों ने अपने खिलाफ प्राथमिकी रद्द करने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और उन्होंने सोशल मीडिया पर रावत के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच की मांग नहीं की थी। शीर्ष अदालत ने कहा कि रावत के खिलाफ जांच या आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की कोई प्रार्थना नहीं की गई थी। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस सीटी रविकुमार की पीठ ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा पारित आदेश टिकाऊ नहीं है और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट (फाइल)
- फोटो : सोशल मीडिया
रिटायर हुए न्यायमूर्ति नजीर
न्यायमूर्ति नजीर बुधवार को रिटायर हो गए। वे अपने अंतिम कार्य दिवस पर सीजेआई के साथ औपचारिक बेंच के हिस्से के रूप में बैठे थे। इस अवसर पर सीजेआई ने कहा, हम दोस्त बने रहेंगे लेकिन मुझे इस बात का दुख है कि मैं अब इनके साथ दोबारा बेंच साझा नहीं करूंगा। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा (जो औपचारिक बेंच का भी हिस्सा थे) ने एक वरिष्ठ वकील के रूप में अपने उनदिनों को याद किया जब वह न्यायमूर्ति नजीर के सामने बहस किया करते थे।
जानें जस्टिस नजीर के बारे में
जस्टिस नजीर का जन्म 5 जनवरी, 1958 को हुआ था और उन्होंने 18 फरवरी, 1983 को एक वकील के रूप में नामांकन कराया था। उन्होंने कर्नाटक उच्च न्यायालय के समक्ष अभ्यास किया और 12 मई, 2003 को उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त हुए। वह 24 सितंबर, 2004 को स्थायी न्यायाधीश बने। उन्हें 17 फरवरी, 2017 को भारत के सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत किया गया था। न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर अयोध्या भूमि विवाद, तीन तालक और निजता के अधिकार जैसे कई अहम फैसलों का हिस्सा रहे हैं।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़(फाइल)
- फोटो : ANI
जस्टिस एसए नजीर हमेशा सही के लिए खड़े रहे : सीजेआई चंद्रचूड़
देश के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) डीवाई चंद्रचूड़ ने बुधवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस एस अब्दुल नजीर हमेशा सही के लिए खड़े होते थे और सही और गलत का सामना करने पर तटस्थ रहने वाले नहीं थे। सीजेआई ने याद किया कि कैसे उन्होंने अयोध्या मामले के दौरान जस्टिस नजीर के साथ बेंच शेयर की थी और उनके साथ काम किया था।
सुप्रीम कोर्ट।
- फोटो : ANI
वकीलों को उच्च न्यायालयों में नियुक्त नहीं करने पर विचार करने संबंधी याचिका खारिज
सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के वकीलों को हाईकोर्ट में न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए विचार न करने का एक निर्देश जारी करने संबंधी याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने मामले में 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने कहा कि याचिका में कोई दम नहीं है। यह न्यायिक समय की पूरी तरह से बर्बादी है। जस्टिस एसके कौल और न्यायमूर्ति एएस ओका की पीठ ने कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जो शीर्ष अदालत में वकालत कर रहे वकीलों को उच्च न्यायालयों में बतौर न्यायाधीश नियुक्त किए जाने से निषिद्ध करता हो।
हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट हल्द्वानी में रेलवे की 29 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड हाईकोर्ट के निर्देश को चुनौती देने वाली याचिका पर गुरुवार को सुनवाई करेगा। रेलवे के मुताबिक उसकी भूमि पर 4,365 लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति एसए नजीर और जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने प्रशांत भूषण की ओर से मामले का जिक्र किए जाने के बाद इसे सुनवाई के लिए स्वीकार किया।