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SC Updates: यमन में निमिषा प्रिया की मौत की सजा पर लगी रोक, सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को दी जानकारी

Thu, 16 Oct 2025 01:07 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

जब कोर्ट ने पूछा कि निमिषा की सजा का क्या हुआ तो यमन में फंसी नर्स को बचाने के लिए अभियान चला रहे याचिकाकर्ता संगठन सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल की तरफ से वकील ने कहा कि सजा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत के अटॉर्नी जनरल (एजी) आर. वेंकटरमाणी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि यमन में मौत की सजा पाने वाली नर्स निमिषा प्रिया अंतरिम राहत दी गई है और इस मामले में कुछ भी बुरा नहीं हुआ है। केंद्र की तरफ से पेश हुए एजी ने जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच को बताया कि इस मामले में एक नए मध्यस्थ आए हैं। 
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जब कोर्ट ने पूछा कि निमिषा की सजा का क्या हुआ तो यमन में फंसी नर्स को बचाने के लिए अभियान चला रहे याचिकाकर्ता संगठन सेव निमिषा प्रिया इंटरनेशनल एक्शन काउंसिल की तरफ से वकील ने कहा कि सजा पर फिलहाल रोक लगा दी गई है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने आगे की सुनवाई जनवरी 2026 में करने की बात कही। 

 

महिला पत्रकारों की पुलिस हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने दो महिला पत्रकारों को पुलिस हिरासत में लेने की तेलंगाना हाईकोर्ट की अनुमति पर रोक लगा दी है। इन पत्रकारों पर मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी वाला एक वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप है।

जस्टिस विक्रमनाथ और संदीप मेहता की पीठ ने पल्स न्यूज की मैनेजिंग डायरेक्टर पोगाडदबंडा रेवती और रिपोर्टर बंदी संध्या की याचिका पर सुनवाई करते हुए तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि जमानत मिलने के 200 दिन बाद और नियमित रूप से जांच में सहयोग करने के बावजूद उन्हें पुलिस हिरासत में लेना गलत और कानून के सिद्धांतों के खिलाफ है। हाईकोर्ट ने पुलिस को सबूत (जैसे मोबाइल, लैपटॉप) जब्त करने के लिए हिरासत में लेने की अनुमति दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे फिलहाल स्थगित कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ अवमानना याचिका वापस ली गई
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। यह याचिका एक सार्वजनिक ट्रस्ट 'आत्मदीप' की ओर से दायर की गई थी। ट्रस्ट ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने शिक्षक भर्ती घोटाले पर आए कोर्ट के फैसले की आलोचना करके न्यायपालिका की अवमानना की है।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणि ने फौजदारी अवमानना की कार्रवाई के लिए अनुमति नहीं दी है। गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन CJI संजीव खन्ना कर रहे थे, 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) द्वारा की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अवैध करार दिया था। इसी पर ममता बनर्जी ने कथित रूप से टिप्पणी करते हुए फैसले की आलोचना की थी।

 

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सुप्रीम कोर्ट में ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम 2021 की वैधता पर अंतिम सुनवाई शुरू
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने मद्रास बार एसोसिएशन की ओर से पक्ष रखा।

दातार ने बताया कि जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्राइब्यूनल रिफॉर्म ऑर्डिनेंस की कई धाराओं को खारिज कर दिया था क्योंकि वे न्यायिक स्वतंत्रता और सत्ता के विभाजन के सिद्धांतों के खिलाफ थीं। उन्होंने कहा कि कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद केंद्र सरकार ने उसी साल अगस्त में जो नया ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम बनाया, उसमें वे सभी प्रावधान जैसे के तैसे शामिल कर दिए गए जो पहले अदालत ने असंवैधानिक करार दिए थे।

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