सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी के खिलाफ अवमानना याचिका वापस ली गई
गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग वाली याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। यह याचिका एक सार्वजनिक ट्रस्ट 'आत्मदीप' की ओर से दायर की गई थी। ट्रस्ट ने आरोप लगाया था कि ममता बनर्जी ने शिक्षक भर्ती घोटाले पर आए कोर्ट के फैसले की आलोचना करके न्यायपालिका की अवमानना की है।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ को बताया गया कि अटॉर्नी जनरल (AG) आर. वेंकटरमणि ने फौजदारी अवमानना की कार्रवाई के लिए अनुमति नहीं दी है। गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की एक अन्य पीठ ने, जिसकी अध्यक्षता तत्कालीन CJI संजीव खन्ना कर रहे थे, 2016 में पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (WBSSC) द्वारा की गई शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को अवैध करार दिया था। इसी पर ममता बनर्जी ने कथित रूप से टिप्पणी करते हुए फैसले की आलोचना की थी।
सुप्रीम कोर्ट में ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम 2021 की वैधता पर अंतिम सुनवाई शुरू
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम, 2021 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने मद्रास बार एसोसिएशन की ओर से पक्ष रखा।
दातार ने बताया कि जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्राइब्यूनल रिफॉर्म ऑर्डिनेंस की कई धाराओं को खारिज कर दिया था क्योंकि वे न्यायिक स्वतंत्रता और सत्ता के विभाजन के सिद्धांतों के खिलाफ थीं। उन्होंने कहा कि कोर्ट की टिप्पणियों के बावजूद केंद्र सरकार ने उसी साल अगस्त में जो नया ट्राइब्यूनल सुधार अधिनियम बनाया, उसमें वे सभी प्रावधान जैसे के तैसे शामिल कर दिए गए जो पहले अदालत ने असंवैधानिक करार दिए थे।