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SC: AIFF के विधान को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी जस्टिस नागेश्वर राव को मिली, 31 जुलाई तक देनी होगी रिपोर्ट

Tue, 02 May 2023 11:01 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, नई दिल्ली।

सार

मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति राव संबंधित पक्षों को सुनने के बाद मसौदा विधान पर अनेक हितधारकों की आपत्तियों का ध्यान रखते हुए रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं।
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सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने हितधारकों की आपत्तियों पर विचार करने के बाद अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के विधान के नियमन के लिए एक मसौदा रिपोर्ट तैयार करने के लिए शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव को नियुक्त किया। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव से एआईएफएफ के विधान को अंतिम रूप देने पर 31 जुलाई तक एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा।

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मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ ने कहा कि न्यायमूर्ति राव संबंधित पक्षों को सुनने के बाद मसौदा विधान पर अनेक हितधारकों की आपत्तियों का ध्यान रखते हुए रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं।

शीर्ष अदालत ने कहा, हमारा विचार है कि इस कवायद (विधान को अंतिम रूप देने) को स्थगित करना उचित होगा क्योंकि ये कानून के मुद्दे नहीं हैं बल्कि भारत में फुटबॉल के संचालन से जुड़ा नीतिगत मामला है। अदालत ने कहा, "यह ध्यान में रखते हुए कि भारतीय ओलंपिक संघ का मामला न्यायमूर्ति एलएन राव द्वारा देखा गया था, हम न्यायमूर्ति राव को एआईएफएफ का विधान तैयार करने का काम सौंपते हैं। हम उनसे अनुरोध करते हैं कि वे तैयार किए गए मसौदा विधान को लें और एक रिपोर्ट को अंतिम रूप दें। न्यायमूर्ति राव से अनुरोध है कि रिपोर्ट को अंतिम रूप देने से पहले सभी हितधारकों का पक्ष सुनें।"
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अदालत के फैसले में कहा गया है कि विधान मसौदे पर विचार करने और व्यापक रिपोर्ट तैयार करने का काम 31 जुलाई तक पूरी कर ली जानी चाहिए। इससे पहले, शीर्ष अदालत ने पांच अप्रैल को कहा था कि वह दो मई को एआईएफएफ से संबंधित मुद्दों पर दलीलों के एक समूह पर सुनवाई करेगी, जिसमें इसके मसौदा विधान के कुछ पहलुओं पर आपत्तियां भी शामिल हैं। हितधारकों में फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन (फीफा) और देश में खेल निकाय शामिल हैं।

2020 दिल्ली दंगा: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज की

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उसने 2020 में पूर्वोत्तर दिल्ली में हुए दंगा मामले में तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत दिए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का विरोध किया था। दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिकाओं में संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुए सांप्रदायिक हिंसा मामले में छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत दिए जाने के दिल्ली हाईकोर्ट के 15 जून 2021 के फैसले को चुनौती दी थी।

न्यायमूर्ति एसके कौल और न्यायमूर्ति ए अमानुल्ला की पीठ ने दिल्ली पुलिस की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया। पीठ ने कहा, विशेष अनुमति याचिका खारिज की जाती है। इस मामले में जुलाई 2021 को हुई सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने तीन कार्यकर्ताओं को दी गई जमानत रद्द करने के पहलू पर गौर करने के प्रति अनिच्छा व्यक्त की। इन लोगों के खिलाफ कड़े आतंक रोधी कानून तथा गैर कानूनी गतिविधि(रोकथाम) अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इससे पहले पुलिस ने अपनी दलील में कहा था कि दंगे में 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये दंगे तब हुए थे जब अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में थे। पुलिस ने हाईकोर्ट के फैसले के विरोध में कहा था कि हाईकोर्ट की व्याख्या आतंकी मामलों में अभियोजन को कमजोर करेगी।

गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने आरोपियों को जमानत देने हुए कहा था कि असहमति को दबाने की जल्दबाजी में राज्य ने प्रदर्शन के अधिकार एवं आतंकी गतिविधि के बीच की रेखा को धुंधला कर दिया और अगर इस प्रकार की मानसिकता को बल मिलता है तो ‘‘यह लोकतंत्र के लिए दुखद दिन होगा।’’

हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने पर 'सुप्रीम' रोक
याचिकाओं के लंबित रहने तक उत्तराखंड के हल्द्वानी में अतिक्रमण हटाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि हल्द्वानी में रेलवे द्वारा दावा की गई 29 एकड़ जमीन से अतिक्रमण हटाने के उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर रोक लगाने का उसका आदेश अदालत में याचिकाओं के लंबित रहने तक जारी रहेगा। 

गौरतलब है कि शीर्ष अदालत ने पांच जनवरी को एक अंतरिम आदेश में 29 एकड़ भूमि से अतिक्रमण हटाने के हाई कोर्ट के निर्देशों पर रोक लगा दी थी। साथ ही यह भी कहा था कि यह एक मानवीय मुद्दा है और 50,000 लोगों को रातोंरात नहीं हटाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की दिल्ली पुलिस की याचिका
2020 दिल्ली दंगे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने तीन छात्र कार्यकर्ताओं को जमानत देने के दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका खारिज कर दी। इस दौरान अदालत ने यह भी कहा कि वे लगभग दो साल से जमानत पर बाहर हैं। ऐसे में जमानत के खिलाफ दिल्ली पुलिस की याचिका का कोई उद्देश्य नहीं दिखता है।  

न्यायमूर्ति एस के कौल और न्यायमूर्ति ए अमानुल्ला की पीठ ने दिल्ली पुलिस की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए उन्हें खारिज कर दिया। दिल्ली पुलिस ने अपनी याचिकाओं में संशोधित नागरिकता अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा मामले में छात्र कार्यकर्ता नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ इकबाल तन्हा को जमानत दिए जाने के दिल्ली उच्च न्यायालय के 15 जून 2021 के फैसलों को चुनौती दी थी।
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SC ने पूर्व न्यायाधीश राव को AIFF के गठन को अंतिम रूप देने पर रिपोर्ट तैयार करने का काम सौंपा
 सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को शीर्ष अदालत के पूर्व न्यायाधीश एल नागेश्वर राव को देश में खेलों के संचालन के लिये अखिल भारतीय फुटबाल महासंघ (एआईएफएफ) के संविधान को अंतिम रूप देने पर एक रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। शीर्ष कोर्ट ने पूर्व न्यायाधीश राव से कहा है कि वे इस संबंध में आपत्तियों पर गौर करने के बाद फीफा सहित विभिन्न हितधारकों द्वारा एक मसौदा दस्तावेज के लिए 31 जुलाई तक विस्तृत रिपोर्ट तैयार करके पेश करें। 

साथ ही शीर्ष अदालत ने यह निर्देश भी दिया है कि एआईएफएफ के गठन को अंतिम रूप देने में न्यायमूर्ति राव के पैनल द्वारा किए जाने वाले खर्च का वहन फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) द्वारा किया जाएगा। यह रिलायंस की सहायक कंपनी है जोकि शीर्ष स्तरीय फुटबॉल लीग-इंडियन सुपर लीग का संचालन करती है। 
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