24 साल पहले पत्नी के कथित प्रेमी को घायल करने के दोषी शख्स को SC से राहत
24 साल पहले साल 1999 में पत्नी के कथित प्रेमी पर कैंची से हमला करने के दोषी व्यक्ति को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली। दरअसल, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने उसे दी गयी सजा को कम करके पहले से काटी गयी जेल के साथ समायोजित कर दिया।
इसके साथ ही न्यायालय ने यह भी कहा कि हत्या के प्रयास के अपराध के लिए उसकी दोषसिद्धि को बरकरार नहीं रखा जा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोषी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 326 के तहत अपराध का मामला बनाया गया था, जो खतरनाक हथियारों या साधनों से जानबूझकर गंभीर चोट पहुंचाने से संबंधित है। शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के अक्टूबर 2018 के फैसले के खिलाफ दोषी की अपील पर अपना फैसला सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने अदालत परिसर में एहतियाती उपाय अपनाने को कहा
दिल्ली में कोविड-19 के बढ़ते मामलों के बीच सुप्रीम कोर्ट ने शीर्ष अदालत के परिसर में मास्क पहनने, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने और शारीरिक दूरी के नियमों समेत एहतियाती उपायों का पालन करने को कहा है। इस संबंध में शीर्ष कोर्ट ने 10 अप्रैल को नोटिस जारी किया। इसमें कहा गया है कि दिल्ली में कोविड मामलों में वृद्धि को देखते हुए सक्षम प्राधिकारी ने निर्देश दिया है कि उच्चतम न्यायालय में मास्क पहनने, सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने और शारीरिक दूरी के मानदंडों को बनाए रखने सहित अन्य एहतियाती उपायों का पालन किया जाए।
दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को 484 नए मामले आए और संक्रमण दर 26.58 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसका अर्थ है कि परीक्षण किए गए प्रत्येक चार नमूनों में से लगभग एक में संक्रमण की पुष्टि हुई।
राजनीतिक विरोधियों को परास्त करने के लिए राज्य मशीनरी के इस्तेमाल की छूट नहीं दे सकते-SC
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सत्तारूढ़ पार्टियों को अपने राजनीतिक विरोधियों के ज्ञान को खत्म करने के लिए राज्य मशीनरी के इस्तेमाल की अनुमति देकर देश लोकतंत्र को खोने का जोखिम नहीं उठा सकता है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को तमिलनाडु में द्रमुक और अन्नाद्रमुक सरकारों के बीच एक रोजगार योजना को लेकर चल रही खींचतान पर यह टिप्पणी की।
जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की पीठ ने मद्रास हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया जिसमें तमिलनाडु सरकार को ग्राम स्तरीय कार्यकर्ता पदनाम के तहत पद बनाने का निर्देश दिया था। इस योजना को मक्कल नाला पनियालारगल (एमएनपी) के रूप में जाना जाता है। तमिलनाडु सरकार ने ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से 2 सितंबर, 1989 को ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षित युवाओं को रोजगार देने वाली एक योजना शुरू की थी, जिन्होंने ग्राम पंचायत में काम के विभिन्न मदों के लिए 10 वीं कक्षा पूरी की थी। एम करुणानिधि के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार ने राज्य भर में 12,617 ग्राम पंचायतों में शिक्षित युवाओं को रोजगार देने के लिए ‘मक्कल नाला पनियारगल’ योजना शुरू की।