चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़ रखने वाली राष्ट्रीय लोक दल (RLD), पश्चिम बंगाल में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP), आंध्र प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (BRS), मणिपुर में PDA, पुडुचेरी में PMK और मिजोरम में MPC से राज्य पार्टी का दर्जा छिन गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है।
अब छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, माकपा, बसपा, NPP और AAP शामिल हैं। ऐसे में जहां, एक ओर चुनाव आयोग के फैसले से TMC, NCP, CPI नाखुश हैं, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल जश्न मना रहे हैं। आप के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को नगालैंड में, टिपरा मोथा पार्टी को त्रिपुरा, वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी को मेघालय में राज्य पार्टी की मान्यता मिली है।
इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर राष्ट्रीय पार्टी बनने के फायदे क्या हैं? जिन दलों से इसका दर्जा वापस ले लिया गया है, उन्हें क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ेगा? सबसे जल्दी 'आप' के राष्ट्रीय पार्टी बनने के अरविंद केजरीवाल के दावे में कितनी हकीकत है? आइए समझते हैं...