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राष्ट्रीय पार्टी के फायदे: TMC, NCP और CPI चुनाव आयोग के फैसले से क्यों नाखुश? जानें केजरीवाल की खुशी की वजह

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Tue, 11 Apr 2023 10:44 PM IST

सार

सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर राष्ट्रीय पार्टी बनने के फायदे क्या हैं? जिन दलों से इसका दर्जा वापस ले लिया गया है, उन्हें क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ेगा? सबसे जल्दी 'आप' के राष्ट्रीय पार्टी बनने के अरविंद केजरीवाल के दावे में कितनी हकीकत है? आइए समझते हैं... 
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आप को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा - फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़ रखने वाली राष्ट्रीय लोक दल (RLD), पश्चिम बंगाल में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP), आंध्र प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (BRS), मणिपुर में PDA, पुडुचेरी में PMK और मिजोरम में MPC से राज्य पार्टी का दर्जा छिन गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है।

अब छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, माकपा, बसपा, NPP और AAP शामिल हैं। ऐसे में जहां, एक ओर चुनाव आयोग के फैसले से TMC, NCP, CPI नाखुश हैं, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल जश्न मना रहे हैं। आप के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को नगालैंड में, टिपरा मोथा पार्टी को त्रिपुरा, वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी को मेघालय में राज्य पार्टी की मान्यता मिली है।



 
इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर राष्ट्रीय पार्टी बनने के फायदे क्या हैं? जिन दलों से इसका दर्जा वापस ले लिया गया है, उन्हें क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ेगा? सबसे जल्दी 'आप' के राष्ट्रीय पार्टी बनने के अरविंद केजरीवाल के दावे में कितनी हकीकत है? आइए समझते हैं... 
 
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आप को मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा - फोटो : अमर उजाला
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (TMC), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस ले लिया है। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अच्छी पकड़ रखने वाली राष्ट्रीय लोक दल (RLD), पश्चिम बंगाल में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (RSP), आंध्र प्रदेश में भारत राष्ट्र समिति (BRS), मणिपुर में PDA, पुडुचेरी में PMK और मिजोरम में MPC से राज्य पार्टी का दर्जा छिन गया है। वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया है।

अब छह राष्ट्रीय पार्टियां हैं, जिनमें भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस, माकपा, बसपा, NPP और AAP शामिल हैं। ऐसे में जहां, एक ओर चुनाव आयोग के फैसले से TMC, NCP, CPI नाखुश हैं, वहीं आम आदमी पार्टी (AAP) के मुखिया अरविंद केजरीवाल जश्न मना रहे हैं। आप के अलावा लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को नगालैंड में, टिपरा मोथा पार्टी को त्रिपुरा, वॉइस ऑफ द पीपुल पार्टी को मेघालय में राज्य पार्टी की मान्यता मिली है।


 
इस बीच सबसे बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर राष्ट्रीय पार्टी बनने के फायदे क्या हैं? जिन दलों से इसका दर्जा वापस ले लिया गया है, उन्हें क्या-क्या नुकसान उठाना पड़ेगा? सबसे जल्दी 'आप' के राष्ट्रीय पार्टी बनने के अरविंद केजरीवाल के दावे में कितनी हकीकत है? आइए समझते हैं... 
 

तीन मानकों को पूरा करने पर मिलता है राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा 

1. पार्टी को कम से कम चार राज्यों में छह फीसदी या उससे अधिक वोट हासिल हुआ हो। एनसीपी, टीएमसी और सीपीआई इसी आधार पर दर्जा मिला था। अब वो इसे पूरा नहीं करते। इसकी वजह से तीनों पार्टियों से राष्ट्रीय दल होने का दर्जा चुनाव आयोग ने वापस ले लिया।

2. राजनीतिक पार्टी अगर तीन अलग-अलग राज्यों को मिलाकर लोकसभा की दो फीसदी सीटें जीतती है या कम से कम 11 सीटें जीते। यहां यह जरूरी होता है कि ये 11 सीटें किसी एक राज्य से न होकर तीन अलग-अलग राज्यों से होनी चाहिए। ऐसी स्थिति में राष्ट्रीय दल का दर्जा मिल सकता है। टीएमसी के पास लोकसभा की 24 सीटें हैं, लेकिन सभी पश्चिम बंगाल से जीती हैं। 

3. पार्टी को चार राज्यों में क्षेत्रीय दल का दर्जा मिला हो। 
 

आम आदमी पार्टी को कैसे मिला राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा? 
आम आदमी पार्टी (AAP) की अभी दो राज्यों में सरकार है। दिल्ली और पंजाब दोनों ही राज्यों में पूर्ण बहुमत के साथ आप ने सरकार बनाई है। राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए आप को गुजरात या हिमाचल में छह प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर पाने की जरूरत थी। गुजरात में आम आदमी को करीब 13% वोट शेयर मिला है। इसके चलते वह राष्ट्रीय पार्टी बन गई है। किसी पार्टी को राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनाव में चार राज्यों में छह प्रतिशत या उससे ज्यादा वोट हासिल करना जरूरी होता है। आप ने पहले ही तीन राज्यों दिल्ली, पंजाब और गोवा में छह प्रतिशत से ज्यादा वोट शेयर हासिल कर लिया था। गुजरात चुनाव के बाद उसने राष्ट्रीय पार्टी बनने की अहर्ता पा ली। 
 

राष्ट्रीय पार्टी को मिलने वाले फायदे क्या होते हैं? 
  • राष्ट्रीय पार्टियों का चुनाव चिह्न देशभर में सुरक्षित हो जाता है। इस चिह्न का प्रयोग कोई दूसरा नहीं कर पाता है। 
  • राष्ट्रीय पार्टियां चुनाव प्रचार में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक रख सकती हैं साथ ही इनके यात्रा खर्च को उम्मीदवार के चुनाव खर्च में नहीं रखा जाता है। 
  • राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय पार्टियों को सब्सिडी दर पर पार्टी अध्यक्ष और पार्टी कार्यालय के लिए एक सरकारी बंगला किराए पर मिलता है।
  • आम चुनावों के दौरान राष्ट्रीय पार्टियों को आकाशवाणी पर प्रसारण के लिए ब्रॉडकास्ट और टेलीकास्ट बैंड्स मिलते हैं। यानी राष्ट्रीय पार्टियों को सरकारी चैनलों पर दिखाए जाने का समय तय होता है।
  • राष्ट्रीय पार्टियों को नामांकन दाखिल करने के लिए केवल एक प्रस्तावक की जरूरत होती है। अन्य पार्टियों के उम्मीदवारों को कम से कम दो प्रस्तावक चाहिए होते हैं। वहीं, गैर मान्यता प्राप्त पार्टियों और निर्दलीय उम्मीदवारों को पांच प्रस्तावकों की जरूरत होती है। 
  • राष्ट्रीय पार्टियों को मतदाता सूची के दो सेट मुफ्त में दिए जाते हैं। साथ ही इनके उम्मीदवारों को आम चुनावों के दौरान एक प्रति मुफ्त मिलती है।

TMC, NCP और CPI से क्या-क्या छिन जाएगा?
  • ईवीएम या बैलेट पेपर की शुरुआत में दल का चुनाव चिह्न नहीं दिखाई देगा। 
  • जरूरी नहीं कि राजनीतिक दलों की बैठक में इन पार्टियों के प्रतिनिधियों को बुलाया जाए। 
  • दूरदर्शन और आकाशवाणी में मिलने वाला टाइम स्लॉट छिन जाएगा। 
  • दिल्ली में दफ्तर और अध्यक्ष के आवास के लिए मिले बंगले को वापस करना होगा। 
  • स्टार प्रचारकों की संख्या 40 से घटकर 20 हो जाएगी। 
  • राज्यों के चुनाव लड़ने के लिए अलग से चुनाव चिह्न लेना होगा। 
  • पॉलिटिकल फंडिग पर प्रभाव पड़ेगा। 

क्या केजरीवाल का दावा सही है?
राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिलने के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने खुशी जाहिर की। इस दौरान उन्होंने ये भी दावा किया कि 'आप' पहली ऐसी पार्टी है, जिसकी स्थापना के बाद सबसे जल्दी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला है। हमने उनके इस दावे की पड़ताल की तो यह गलत निकला। आम आदमी पार्टी से पहले भी कई पार्टियां हैं, जिन्हें आप से जल्दी राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल चुका है। 

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी यानी NCP का गठन 1999 में हुआ था। इसके एक साल बाद यानी साल 2000 में ही इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया था। वहीं, NPP का गठन 2013 में हुआ। गठन से छह साल बाद ही 2019 में  उसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया। जिन पार्टियों से राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा छिना है उनकी बात करें तो, सीपीआई का गठन 1925 में हुआ था और 1989 में इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिल गया था। टीएमसी का गठन 1998 में हुआ था और 2016 में इसे राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा मिला था।

चुनाव आयोग के फैसले पर भाकपा ने कही यह बात
इस बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने राष्ट्रीय पार्टी का दर्जा वापस लिए जाने के एक दिन बाद मंगलवार को कहा कि निर्वाचन आयोग को यह फैसला करने से पहले इस पर भी विचार करना चाहिए था कि स्वतंत्रता आंदोलन में भाकपा की क्या भूमिका थी। भाकपा ने एक बयान में यह भी कहा कि वह देश की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक है और आज भी उसकी अखिल भारतीय स्तर पर पहुंच और जनसमर्थन है। वह देश के लिए अपनी समर्पित सेवा और लोगों के अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

टीएमसी ने निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
ष्ट्रीय पार्टी का दर्जा खोने के एक दिन बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाया। पार्टी ने कहा कि क्या कांग्रेस तथा भाजपा को छोड़कर अन्य दलों ने इस प्रतिष्ठित दर्जे से संबंधित सभी निर्धारित नियमों को पूरा किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी निर्वाचन आयोग के फैसले को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प भी तलाश रही है। हालांकि, पार्टी निर्वाचन आयोग को एक औपचारिक अपील करके फैसले की समीक्षा करने के लिए कहेगी।
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