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सुप्रीम कोर्ट अपडेट: 'बदहाल स्कूलों' पर बिहार से जवाब तलब; SC में सिसोदिया की अपील; बीबीसी की याचिका पर नोटिस

Mon, 04 Mar 2024 02:21 PM IST
काव्या मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने स्कूलों की बदहाली मामले में बिहार सरकार से जवाब मांगा है। एक अन्य मामले में दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने अपील दायर की है। दिन के एक अन्य मामले में  उच्चतम न्यायालय ने कथित अवैध धर्मांतरण के एक मामले में उत्तर प्रदेश की शुआट्स के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल को सोमवार को अंतरिम जमानत दे दी। पढ़िए अदालत में सुनवाई से जुड़ी सुर्खियां
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सुप्रीम कोर्ट - फोटो : ANI
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विस्तार
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आम आदमी पार्टी (आप) के नेता मनीष सिसोदिया फिलहाल जेल में बंद हैं। उन्होंने सोमवार को कथित दिल्ली आबकारी नीति घोटाले से संबंधित भ्रष्टाचार और धनशोधन मामलों में उन्हें जमानत देने से इनकार करने वाले अदालत के 2023 के फैसले को चुनौती देने वाली अपनी दो क्यूरेटिव याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग की।
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प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायाधीश जेबी पारदीवाला और मनोज मिश्रा की पीठ सोमवार को इस मामले में सुनवाई कर रही थी। सिसोदिया की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी ने बताया कि निचली अदालत ने कहा है कि वह क्यूरेटिव फैसला आने तक जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं करेगी।

इस पर पीठ ने कहा, 'इस मामले में एक मेल करिए। हम इस पर गौर करेंगे।'

उच्चतम न्यायालय के समक्ष अर्जी लंबित
दिल्ली की एक अदालत ने सिसोदिया की जमानत याचिका पर सुनवाई टालते हुए कहा था कि इस मामले से संबंधित अर्जी उच्चतम न्यायालय के समक्ष लंबित है। उच्चतम न्यायालय ने सिसोदिया की जमानत याचिकाओं को खारिज करने संबंधी अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के अनुरोध वाली याचिका 14 दिसंबर, 2023 को खारिज कर दी थी। न्यायालय ने कहा था कि साक्ष्य जांच एजेंसी के इस आरोप का अस्थायी रूप से समर्थन करते हैं कि शराब के कुछ थोक वितरकों को 338 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाया गया।
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पिछले साल किया था गिरफ्तार
सिसोदिया को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 26 फरवरी, 2023 को ‘घोटाले’ में उनकी कथित भूमिका के मामले में गिरफ्तार किया था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सीबीआई की प्राथमिकी से जुड़े धनशोधन के मामले में तिहाड़ जेल में पूछताछ के बाद सिसोदिया को नौ मार्च, 2023 को गिरफ्तार किया था। सिसोदिया ने 28 फरवरी, 2023 को दिल्ली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था।

धर्मांतरण मामले में शुआट्स के कुलपति को अंतरिम जमानत

उच्चतम न्यायालय ने कथित अवैध धर्मांतरण के एक मामले में उत्तर प्रदेश के सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल को सोमवार को अंतरिम जमानत दे दी।

प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय को चुनौती देने वाली लाल की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है।

न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय लाल की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा है जो पिछले साल 31 दिसंबर से हिरासत में हैं। पीठ ने कहा, ‘नोटिस जारी किया जाए और इस बीच हम याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हैं। जमानती मुचलके की राशि 25,000 रुपये से ज्यादा नहीं होगी।'

लाल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता को गिरफ्तार किया गया। 

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले अदालत को बताया था कि लाल और अन्य आरोपी करीब 20 देशों से मिलने वाली विदेशी निधि का इस्तेमाल कर बड़े पैमाने पर धर्मांतरण कार्यक्रम के मुख्य साजिशकर्ता हैं। पुलिस ने कहा था कि मामले में अन्य आरोपियों में शामिल विनोद बिहारी लाल वास्तव में पिछले दो दशकों में राज्य में धोखाधड़ी और हत्या समेत विभिन्न प्रकृति के 38 मामलों में शामिल एक कुख्यात अपराधी है।

लाल तथा अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गयी। पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि लगभग 90 हिंदू, ईसाई धर्म अपनाने के उद्देश्य से हरिहरगंज, फतेहपुर में ‘इवेंजेलिकल चर्च ऑफ इंडिया’ में एकत्रित हुए थे और उन्हें अनुचित प्रभाव, दबाव में रखा गया था और पैसों का प्रलोभन दिया गया था।

स्कूलों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक अन्य अहम मामले में बिहार सरकार से जवाब मांगा। अदालत में चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने एनजीओ- सोशल ज्यूरिस्ट की तरफ से दायर अपील पर नोटिस जारी किया। इस याचिका में बिहार के सरकारी स्कूलों की खराब स्थिति का आरोप लगाया गया है। अदालत ने स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी के आरोप पर भी जवाब मांगा। एनजीओ ने 19 जनवरी, 2024 को पारित पटना उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया है। हाईकोर्ट में याचिका खारिज हो गई थी। उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान सीएम नीतीश कुमार की सरकार ने अदालत को बताया था कि राज्य में प्राथमिक स्तर की शिक्षा में सुधार के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।

बीबीसी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस; कर्नाटक हाईकोर्ट से भी जुड़ा है मामला

कर्नाटक हाईकोर्ट - फोटो : एएनआई
'वाइल्ड कर्नाटक' डॉक्यूमेंट्री दिखाने के मामले में ब्रिटिश ब्रॉडकास्ट कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है। डॉक्यूमेंट्री दिखाने पर कर्नाटक हाईकोर्ट में अवमानना की कार्यवाही शुरू की गई है। इसके खिलाफ बीबीसी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सोमवार को नोटिस जारी किया। उच्च न्यायालय ने बीबीसी, डिस्कवरी और नेटफ्लिक्स सहित विभिन्न प्रसारकों के खिलाफ नागरिक अवमानना के आरोप तय किए थे। मामला हाईकोर्ट में 2021 में पारित आदेश से जुड़ा है।

जनवरी के आदेश में अवमानना की कार्यवाही पर रोक
खबर के मुताबिक अदालत की तरफ से रोक के बावजूद डॉक्यूमेंट्री- 'वाइल्ड कर्नाटक' दिखाने के लिए बीबीसी के ओटीटी प्लेटफॉर्म के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी। बीबीसी ने सुप्रीम कोर्ट में इसी कार्यवाही को चुनौती दी है। अदालत ने नोटिस जारी कर मामले को नेटफ्लिक्स की तरफ से दायर इसी तरह की याचिका के साथ टैग कर दिया। बता दें कि शीर्ष अदालत ने 25 जनवरी, 2024 को पारित आदेश में डॉक्यूमेंट्री दिखाने के लिए नेटफ्लिक्स के खिलाफ कर्नाटक उच्च न्यायालय की तरफ से शुरू अवमानना की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

2021 में पारित हाईकोर्ट का आदेश
बता दें कि कर्नाटक उच्च न्यायालय ने 29 जून, 2021 को रवींद्र एन रेडकर और उल्लाश कुमार की याचिका पर अंतरिम आदेश पारित किया था। हाईकोर्ट ने फिल्म निर्माताओं और डॉक्यूमेंट्री से जुड़े प्लेटफार्म को वन विभाग से हासिल फिल्म और उसके कच्चे फुटेज के किसी भी उपयोग, प्रकाशन, पुनरुत्पादन, प्रसारण, मार्केटिंग, बिक्री या लेनदेन में शामिल होने से प्रतिबंधित कर दिया था।

 शुआट्स विश्वविद्यालय के कुलपति लाल को मिली अंतरिम जमानत
 सुप्रीम कोर्ट ने अवैध धर्मांतरण मामले में उत्तर प्रदेश के सैम हिगिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेज (शुआट्स) के कुलपति राजेंद्र बिहारी लाल को अंतरिम जमानत दे दी। सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने इलाहाबाद हाईकोर्ट को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया।

पीठ ने कहा, हाईकोर्ट पिछले साल 31 दिसंबर से हिरासत में बंद लाल की जमानत याचिका पर सुनवाई नहीं कर रहा है। हम नोटिस जारी करेंगे। इस बीच हम याचिकाकर्ता को अंतरिम जमानत देते हैं। पीठ ने यह भी कहा कि जमानत के लिए बॉन्ड राशि 25 हजार रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। लाल के वकील सिद्धार्थ दवे ने पीठ को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उनके मुवक्किल को गिरफ्तार किया गया। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पहले शीर्ष अदालत को बताया था कि लाल और अन्य आरोपी सामूहिक धर्मांतरण कार्यक्रम के मुख्य अपराधी हैं। इसके लिए 20 देशों से विदेशी चंदा आया है। ये लोग बीते दो दशकों में दर्ज हत्या, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े जैसे करीब 38 विभिन्न प्रकृति के मामलों में आरोपी हैं। लाल व अन्य के खिलाफ आईपीसी और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। 

चुनावी बाॅन्ड से जुड़ी जानकारी देने के लिए एसबीआई ने मांगा 30 जून तक का समय
 सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन देकर भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने निर्वाचन आयोग को चुनावी बॉन्ड से जुड़ी जानकारी देने के लिए 30 जून तक समय बढ़ाने की मांग की है। शीर्ष अदालत की संविधान पीठ ने 15 फरवरी को दिए फैसले में एसबीआई को 6 मार्च तक निर्वाचन आयोग को जानकारी देने का निर्देश था।

वकीलों की नियुक्ति की शक्ति एलजी को सौंपने के फैसले के खिलाफ दिल्ली की याचिका पर केंद्र, एलजी को नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी वकीलों की नियुक्ति की शक्ति एलजी को सौंपने के केंद्र के फैसले को चुनौती देने वाली दिल्ली सरकार की याचिका पर केंद्र और उपराज्यपाल से जवाब मांगा। जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस दीपांकर दत्ता की पीठ ने केंद्र व उपराज्यपाल को नोटिस जारी किया।अपनी याचिका में, दिल्ली सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के जारी 2017 के कार्यालय ज्ञापन और 16 फरवरी को दिल्ली के उपराज्यपाल कार्यालय से पारित आदेश को चुनौती दी है।

याचिका में कहा गया कि दिल्ली एनसीटी की निर्वाचित सरकार को वकील की नियुक्ति पर निर्णय लेने में सक्षम होना चाहिए। अपनी पसंद का वकील चुनने का अधिकार सबसे उत्साहपूर्वक संरक्षित अधिकारों में से एक है। चुनी हुई सरकार को सांविधानिक अदालतों के समक्ष अपने वकील चुनने से रोका नहीं जा सकता। याचिका में कहा गया है कि केंद्र के विवादित ज्ञापन और एलजी के पारित अन्य आदेश दिल्ली के मतदाताओं के हितों का प्रतिनिधित्व करने की सरकार की क्षमता को गंभीर रूप से बाधित करते हैं।

सोशल मीडिया पर पोर्न रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका
सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर पोर्न रोकने की मांग वाली याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई। याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने की मांग की गई है वह सुनिश्चित करे कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अश्लील सामग्री प्रदर्शित न की जाए क्योंकि वे यौन अपराधों में वृद्धि का कारण बनते हैं। बाल रोग विशेषज्ञ संजय कुलश्रेष्ठ ने जनहित याचिका में कहा कि मोबाइल इंटरनेट के माध्यम से पोर्न तक आसान पहुंच न सिर्फ यौन व्यवहार को विकृत कर रही है, बल्कि नाबालिग लड़कियों के खिलाफ यौन अपराधों में चिंताजनक वृद्धि का कारण बन रही है।

याचिका में कहा गया कि यौन अपराधों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने के लिए, शीर्ष अदालत को प्रतिवादियों को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाकर्ता ने केंद्रीय इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, गृह और महिला एवं बाला विकास मंत्रालयों को प्रतिवादी बनाया है। जनहित याचिका में कहा गया कि इसमें कोई दो राय नहीं कि बच्चों में दुष्कर्म की घटनाओं में चिंताजनक वृद्धि के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन आसान व लगभग मुफ्त में इंटरनेट पर 24 घंटे उपलब्ध कराया जा रहा पोर्न एक प्रमुख कारण है। वह इसलिए कि यह विशेष रूप से सभी आयु समूहों, सभी आर्थिक वर्गों के लिए मोबाइल फोन पर उपलब्ध है और इससे समस्या हो सकती है।
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शानन जलविद्युत परियोजना मामले में समन जारी, यथास्थिति के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 99 साल की लीज की समाप्ति पर पंजाब सरकार से शानन जलविद्युत परियोजना का नियंत्रण लेने के हिमाचल प्रदेश सरकार के प्रयास के खिलाफ पंजाब की याचिका पर सोमवार को हिमाचल प्रदेश को समन जारी किया है। यह लीज दो मार्च को समाप्त हो चुकी है। साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार के 1 मार्च के आदेश के अनुरूप पक्षकारों को यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा है। जस्टिस अभय एस ओका की पीठ ने पंजाब सरकार के मुकदमे पर हिमाचल प्रदेश और केंद्र को समन जारी करते हुए 8 अप्रैल को मामले पर विचार करने का निर्णय लिया है। पीठ ने कहा कि पहले अंतरिम राहत पर विचार किया जाएगा। अंतरिम राहत के रूप में पंजाब ने हिमाचल प्रदेश के खिलाफ अंतरिम निषेधाज्ञा के लिए गुहार लगाई है ताकि परियोजना के लिए यथास्थिति बनाए रखी जा सके।
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