फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुर्शिदाबाद हिंसा मामला: 'UAPA पर फैसला करेगा कलकत्ता हाईकोर्ट', सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को दिया बड़ा निर्देश

Wed, 11 Feb 2026 12:02 PM IST
ज्योति भास्कर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि एनआईए की तरफ से यूएपीए लगाने की वैधता अब कलकत्ता हाईकोर्ट तय करेगा। कोर्ट ने एनआईए को सीलबंद स्टेटस रिपोर्ट पेश करने को कहा और राज्य सरकार को हाईकोर्ट में आपत्ति रखने की छूट दी। शीर्ष अदालत ने साफ किया कि वह मामले के मेरिट पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है।

विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद हिंसा मामले में जांच की संवेदनशीलता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से कहा कि वह यूएपीए कानून के तहत अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट कोलकाता हाईकोर्ट में दाखिल करे। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को भी निर्देश दिया गया कि अगर उन्हें एनआईए जांच पर कोई आपत्ति है, तो वे हाईकोर्ट में अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। इस दौरान कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट केंद्र के निर्णय की वैधता भी देख सकती है।

विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि यह जांचना कलकत्ता हाईकोर्ट का काम है कि इस मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की तरफ से गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) कानून यानी यूएपीए लगाना सही था या नहीं। बता दें कि मुख्य न्यायाधीश सीजेआई सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। राज्य सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें केंद्र सरकार को एनआईए जांच सौंपने की छूट दी गई थी। इसके बाद गृह मंत्रालय ने 28 जनवरी को एनआईए को जांच सौंप दी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए को क्या निर्देश दिए
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज करते हुए एनआईए को निर्देश दिया कि वह अपनी स्टेटस रिपोर्ट (जांच की स्थिति) सीलबंद लिफाफे में कलकत्ता हाईकोर्ट में जमा करे। रिपोर्ट में यह बताया जाए कि अब तक जुटाए गए सबूतों के आधार पर यूएपीए की धाराएं लगाना पहली नजर में सही था या नहीं। कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस मामले के गुण-दोष पर कोई राय नहीं दे रहा है। साथ ही निर्देश दिया कि पश्चिम बंगाल सरकार की आपत्तियों पर कलकत्ता हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली खंडपीठ सुनवाई करे, जहां पहले से संबंधित याचिका लंबित है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें:- लोकसभा: एपस्टीन फाइल्स, ट्रंप की धौंस से लेकर अमेरिका के दबदबे तक... राहुल गांधी ने इन बातों पर सरकार को घेरा

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मौखिक रूप से सवाल उठाया कि एनआईए ने एफआईआर दर्ज करते समय यूएपीए की धारा 15 (आतंकवादी कृत्य) किस आधार पर लगाई। कोर्ट ने कहा कि बिना दस्तावेज देखे कैसे कहा जा सकता है कि यूएपीए की धारा सही है? केस डायरी भी सामने नहीं थी। यह पहले से लिया गया निष्कर्ष लगता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि हर भावनात्मक घटना को देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए खतरा नहीं माना जा सकता।

पश्चिम बंगाल सरकार की दलील
वहीं पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में दलील दी कि एनआईए एक्ट के तहत कोई निर्धारित अपराध नहीं हुआ था, जिससे केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपी जाए। उन्होंने कहा कि राज्य पुलिस ने पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली थी और गिरफ्तारियां भी की थीं। ऐसे में विस्फोटक न होने की स्थिति में यूएपीए की धारा 15 कैसे लागू होती है?

वहीं, केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने कहा कि यह घटना बांग्लादेश सीमा के पास हुई, जहां हिंसा में घातक हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इससे राष्ट्रीय सुरक्षा के सवाल उठते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य पुलिस एनआईए को जरूरी दस्तावेज नहीं दे रही है। दलील को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यूएपीए़ लागू करने का फैसला सही था या नहीं, इसका अंतिम फैसला कलकत्ता हाईकोर्ट ही सबूतों को देखकर करेगा।

ये भी पढ़ें:- 'VSR कंपनी के विमान असुरक्षित': रोहित पवार ने सुरक्षा में लापरवाही का लगाया आरोप, DGCA की भूमिका पर भी सवाल

विज्ञापन


अब समझिए क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 20 जनवरी को कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ ने बेलडांगा में दो दिन तक चले तनाव और हिंसा के मामले में केंद्र को एनआईए जांच का आदेश देने की छूट दी थी। यह हिंसा झारखंड में एक प्रवासी मजदूर की कथित हत्या के विरोध में हुए प्रदर्शन के बाद भड़की थी।

इसके बाद विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने इलाके में हालात सामान्य होने तक केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती का भी आदेश दिया था। इसी के बाद गृह मंत्रालय ने मामला एनआईए को सौंपा, जिसे पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। अब आगे की सुनवाई कलकत्ता हाईकोर्ट में होगी, जहां यह तय होगा कि यूएपीए लगाना उचित था या नहीं।

अन्य वीडियो

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें