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प्लास्टिक पैकिंग पर चेतावनी जरूरी: सुप्रीम कोर्ट का मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में दखल से इनकार, कहा- गलत नहीं

Mon, 06 Apr 2026 06:54 PM IST
अमन तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सुप्रीम कोर्ट ने प्लास्टिक पैकेजिंग पर माइक्रोप्लास्टिक चेतावनी लेबल लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जनता को संभावित स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में पता होना चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट (फाइल तस्वीर) - फोटो : ANI
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विस्तार
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सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के एक अहम आदेश में दखल देने से साफ इनकार कर दिया है। मामले में हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि पानी, नमक और चीनी बेचने के लिए इस्तेमाल होने वाली सभी प्लास्टिक या पीईटी (PET) बोतलों और पैकिंग पर एक चेतावनी वाला लेबल होना चाहिए। इस लेबल पर साफ लिखा होना चाहिए कि इन खाद्य पदार्थों में माइक्रो या नैनो प्लास्टिक हो सकता है।
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जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले पर कहा, पैकेट पर चेतावनी दिखाने में कुछ भी गलत नहीं है। कोर्ट ने आगे कहा कि सरकार शायद इस मामले में ढिलाई बरत रही हो, लेकिन हाई कोर्ट इस पर बहुत सख्त है। कई रिपोर्टों में प्लास्टिक पैकिंग के अंदर माइक्रो प्लास्टिक होने की बात सामने आई है। कोर्ट का मानना है कि जनता को इस खतरे के बारे में पता होना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि आज का बाजार ग्राहकों की पसंद पर निर्भर है। लोग अब खुद जागरूक हो रहे हैं और उन्होंने पानी की बोतलों सहित प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करना शुरू कर दिया है।
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ये भी पढ़ें: मालदा हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का फोन न उठाने पर मुख्य सचिव को लगाई फटकार, माफी मांगने के दिए निर्देश

यह पूरा मामला 'पीईटी पैकेजिंग एसोसिएशन फॉर क्लीन एनवायरनमेंट' की एक याचिका से जुड़ा है। इस संस्था ने मद्रास हाई कोर्ट के फरवरी 2024 के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) को आदेश दिया था कि वह इस संबंध में एक नोटिफिकेशन जारी करे।

हाई कोर्ट के निर्देश के मुताबिक, पानी की सभी प्लास्टिक बोतलों पर गहरे लाल रंग के मोटे अक्षरों में यह चेतावनी होनी चाहिए। इसी तरह, प्लास्टिक में बिकने वाली चीनी और नमक के पैकेट पर भी यह जानकारी देना जरूरी है। हाई कोर्ट ने FSSAI से कहा था कि वह सभी कंपनियों को इसे सख्ती से लागू करने का निर्देश दे। यह काम आदेश की कॉपी मिलने के चार हफ्तों के भीतर पूरा होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि ऐसी चेतावनी से लोगों के बीच डर या घबराहट फैल सकती है। जस्टिस नाथ ने कहा, 'लोग प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल कम कर रहे हैं और इस पर ध्यान दे रहे हैं। इसमें (चेतावनी दिखाने में) कुछ भी गलत नहीं है।' इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने और हाई कोर्ट जाने की अनुमति मांगी, जिसे सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने मंजूर कर लिया।
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