सुप्रीम कोर्ट ने नोटबंदी पर सुनवाई टालने की केंद्र की मांग को शर्मनाक बताया। हालांकि जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमनी के अनुरोध पर मामले में सुनवाई को 24 नवंबर तक स्थगित कर दिया। अटॉर्नी जनरल ने मामले में एक व्यापक हलफनामा दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा और पिछले निर्देश का पालन नहीं होने पर पीठ से माफी मांगी।
पीठ ने कहा, आम तौर पर संविधान पीठ इस तरह से कभी भी स्थगित नहीं होती है। हम कभी ऐसे नहीं उठते। यह कोर्ट के लिए भी बहुत शर्मनाक है। अटॉर्नी जनरल ने भी कहा, यह उनके लिए भी शर्मनाक है। याचिकाकर्ताओं के वकील विवेक नारायण शर्मा और अन्य का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा, यह संविधान पीठ के समक्ष कभी भी स्वीकृत प्रथा नहीं रही है। उन्होंने स्थगन अनुरोध का विरोध किया।
दीवान ने कहा, संविधान पीठ से स्थगन के लिए कहना बेहद असामान्य है। याचिकाकर्ताओं को बहस करने की अनुमति दी जानी चाहिए और आरबीआई व केंद्र सरकार हलफनामे दाखिल करने के लिए अपना समय ले सकते हैं। पीठ ने स्थगन की अनुमति देते हुए स्पष्ट किया कि सरकार और आरबीआई को एक सप्ताह के भीतर अपना हलफनामा जमा करना होगा। अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी। 500 और 1000 रुपए के नोटों को प्रचलन से बाहर करने के केंद्र के 2016 के नोटबंदी के फैसले को चुनौती देने से संबंधित 50 से अधिक याचिकाएं संविधान पीठ के समक्ष रखी गई हैं।