सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) के लिए स्थायी भवन और स्थायी कर्मचारियों की वकालत करते हुए कहा कि सरकार के लिए न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों में आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात नहीं करना विवेकपूर्ण होगा। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया कि कैट, जम्मू के कामकाज के लिए एक भवन किराये पर लिया गया है और वहां आउटसोर्स कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी।
अभिलेखों को अद्यतन करना बड़ी चुनौती
जस्टिस सूर्यकांत व जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने अपने आदेश में कहा, न्यायाधिकरण के लिए एक स्थायी भवन होना बहुत जरूरी है। साथ ही उचित न्यायालय कक्ष, कार्यालय और कर्मचारी भी हों। पीठ ने कहा, न्यायिक और अर्ध-न्यायिक निकायों में आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात करना विवेकपूर्ण नहीं हो सकता है, जहां अभिलेखों का रखरखाव, गोपनीयता और अभिलेखों को अद्यतन करना दिन-प्रतिदिन की चुनौतियां हैं। अचल शर्मा की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही पीठ को एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने बताया कि सरकार आउटसोर्सिंग के जरिए रिक्तियों को भर रही है। पीठ ने कहा कि 58 स्वीकृत पदों में से 26 नियमित आधार पर भरे जा रहे हैं, जबकि 10 आउटसोर्स कर्मचारियों से भरे जा रहे हैं।
जम्मू के मामले में हमेशा कैट की एक पीठ थी
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, हाल ही में एक न्यायाधिकरण के सदस्य ने उनसे मुलाकात की और उन्हें बताया गया कि उच्च-दांव वाले मामलों की फाइलें भी आउटसोर्स कर्मचारियों की ओर से संभाली जा रही हैं। अदालत में, आपको किसी ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता होती है जो पूरी तरह से जिम्मेदार हो। उन्होंने कहा कि जम्मू के मामले में हमेशा कैट की एक पीठ थी।
न्यायालय का माहौल अच्छा होना चाहिए
जस्टिस सूर्यकांत ने भाटी से कहा, आप स्थायी बुनियादी ढांचा क्यों नहीं बनाते? कल, यह मकान मालिक बेदखली याचिका दायर करेगा, फिर वही समस्या। न्यायालय का माहौल अच्छा होना चाहिए। इसे किसी निजी घर में, ड्राइंग रूम को न्यायालय में परिवर्तित करके, कार्य नहीं करना चाहिए।
सहायक कर्मचारियों की कमी के कारण न्यायाधिकरण का कामकाज प्रभावित
पिछले साल अगस्त में, कैट, जम्मू में बुनियादी ढांचे की कमी को देखते हुए, शीर्ष अदालत ने न्यायाधिकरण के न्यायिक सदस्य को आवश्यकताओं पर एक स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था, ताकि इसके दिन-प्रतिदिन के कामकाज में बाधा न आए। इसने नोट किया था कि सहायक कर्मचारियों की कमी के कारण न्यायाधिकरण का कामकाज प्रभावित हुआ था।