प्रधान न्यायाधीश
दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यूनिटेक लिमिटेड और इसके एमडी संजय चंद्रा को देश और विदेश स्थित अपनी देनदारी मुक्त सभी संपत्तियों की सूची देने का निर्देश दिया था ताकि इनको बेचकर अभी तक घर नहीं मिलने से परेशान लोगों को उनका पैसा वापस किया जा सके। पीठ ने ओम शक्ति एजेंसी (मद्रास) प्राइवेट लिमिटेड पर 75 लाख का जुर्माना भी लगाया।
यह कार्रवाई कंपनी के उस हलफनामे के बाद लगाया गया जिसमें उसने सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री में 90 करोड़ रुपये जमा करने से इनकार कर दिया। कंपनी ने पहले तमिलनाडु में चेन्नई के नजदीक स्थित यूनिटेक की संपत्ति खरीदने की बात कही थी और इसके लिए पैसा जमा कराने को तैयार हो गया था।
तीन सदस्यीय पीठ ने वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार के हलफनामे पर भी विचार किया। इसमें बंगलूरू स्थित एक कंपनी द्वारा यूनिटेक की सहायक कंपनी को खरीदने की बात कही है और इसके लिए वह 100 करोड़ रुपये जमा कराएगा। इसके अलावा यूनिटेक लिमिटेड ने बताया कि वह बंगलूरू के करीब स्थित अपनी 26 एकड़ जमीन की बिक्री करने जा रहा है और उसे खरीदार के साथ बिक्री करार करने की अनुमति दी जाए।
कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में यूनिटेक को किसी भी संपत्ति की बिक्री या हस्तांतरित करने पर रोक लगा दी थी। हालांकि उसने अपने आदेश में संशोधन करते हुए कंपनी को जमीन की बिक्री की अनुमति दे दी। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी।
750 करोड़ रुपये जमा कराने हैं
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल अक्तूबर में यूनिटेक को कंपनी के एमडी संजय चंद्रा की जमानत के लिए दिसंबर तक 750 करोड़ रुपये जमा कराने का आदेश दिया था ताकि इस रकम से फ्लैट खरीदारों को पैसे लौटाए जा सके लेकिन वह अभी तक 18 करोड़ रुपये ही जमा करा सकी है।
7800 करोड़ की देनदारी
यूनिटेक की करीब 61 परियोजनाओं के 16300 फ्लैट खरीदारों की 7800 करोड़ रुपये की देनदारी है। साथ ही कंपनी 6700 करोड़ रुपये भारी कर्ज भी है।
158 फ्लैट खरीदारों ने दर्ज कराया था आपराधिक मामला
वाइल्ड फ्लावर कंट्री और एंथेरा प्रोजेक्ट के 158 फ्लैट खरीदारों ने फ्लैट नहीं मिलने पर वर्ष 2015 में कंपनी के एमडी संजय चंद्रा के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कराया था।