सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को मृत्युदंड की सजा के रूप दी जाने वाली फांसी की सजा देने के तरीके में बदलाव की एक याचिका की सुनवाई करते हुए भारत सरकार से तीन महीने में जबाव मांगा है।
याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमारा संविधान हर किसी को जीने का और सम्मान से मरने का अधिकार देता है।
कोर्ट ने आगे कहा है कि आधुनिक समय में कई तरीकों के अविष्कार के साथ मौत की सजा पर विचार किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने विधायिका को मौत की सजा के लिए विभिन्न आधुनिक तरीकों के बारे में सोचना और विचार करना चाहिए।
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बता दें कि पिछले काफी समय से फांसी की सजा के खिलाफ आवाज उठाई जाती रही है। सुप्रीम कोर्ट के वकील ऋषि मल्होत्रा ने अपनी याचिका में अदालत से यह दरख्वास्त की थी कि सजा-ए-मौत के तरीके पर विचार किए जाने की जरूरत है।
Our constitution is a compassionate one which recognizes principle of sanctity of life said Supreme Court while hearing the plea
— ANI (@ANI) October 6, 2017