सीजेआई संजीव खन्ना और जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि बीमारियों के इलाज के लिए 50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता की सीमा को लेकर दायर याचिकाओं पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ 13 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई करेगी।
दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए केंद्र की सहायता पर 50 लाख की सीमा पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती जताई है। सुप्रीम कोर्ट स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (एसएमए) जैसी दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए केंद्र की सहायता पर सीमा को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने को तैयार हो गया।
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सीजेआई जस्टिस संजीव खन्ना व जस्टिस संजय कुमार की पीठ ने कहा कि बीमारियों के इलाज के लिए 50 लाख रुपये की केंद्रीय सहायता की सीमा को लेकर दायर याचिकाओं पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ 13 मई से शुरू होने वाले सप्ताह में सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा कि एसएमए की दवा रिस्डिप्लाम बनाने वाली फार्मा कंपनी मेसर्स एफ हॉफमैन-ला रोश लिमिटेड ने एसएमए पीड़ित केरल निवासी 24 वर्षीय सेबा पीए को एक साल के लिए अपनी दवा मुफ्त में देने पर सहमति जताई है। इस दवा की एक बोतल 6.2 लाख रुपये की है।
इससे पहले उन्होंने केरल उच्च न्यायालय का रुख किया था, हाईकोर्ट ने केंद्र को निर्देश दिया था कि वह सेवा को 50 लाख रुपये की सीमा के अलावा 18 लाख रुपये की अतिरिक्त दवाइयां उपलब्ध कराए। शीर्ष अदालत ने 24 फरवरी को केंद्र की अपील पर गौर करने के बाद हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी।
इसमें कहा गया था कि उसे 50 लाख रुपये की सीमा का उल्लंघन करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है और उसने पक्षों को नोटिस जारी किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसके बाद इस दलील पर गौर किया कि एसएमए रोगी के इलाज की लागत 26 करोड़ रुपये तक हो सकती है और रिस्डिप्लाम पाकिस्तान और चीन में काफी सस्ती दरों पर बेची जा रही है।