सुप्रीम कोर्ट सरकारी नौकरियों की पूरी चयन प्रक्रिया की ‘शुद्धता’ को बनाए रखने के लिए इनकी वीडियोग्राफी कराए जाने का पक्षधर है। खास तौर पर उसका जोर राज्य लोक सेवा आयोगों और राज्य चयन बोर्डों को लेकर है। दूरगामी असर वाले एक आदेश में शीर्ष अदालत ने कहा कि परीक्षा केंद्रों और इंटरव्यू कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए। इनकी फुटेज की जांच तीन सदस्यों की स्वतंत्र समिति से कराई जानी चाहिए।
जस्टिस आदर्श कुमार गोयल और रोहिंग्टन फली नरीमन की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को इस आदेश की एक कापी कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के संबंधित अधिकारियों को भेजे जाने का भी निर्देश दिया। पीठ ने कहा, जहां तक हो सके परीक्षा केंद्रों और इंटरव्यू कक्षों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाने चाहिए।
तीन सदस्यीय स्वतंत्र समिति की जांच के बाद उनकी रिपोर्ट को संबंधित वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए। शीर्ष अदालत का यह आदेश मेघालय के एक मामले में आया है। पीठ ने कहा कि राज्य के प्राइमरी स्कूल में सहायक शिक्षक की नियुक्ति प्रक्रिया के दौरान ‘गंभीर अनियमितताएं’ बरतीं गईं।